Fish Catching from Sea मछली खाने वालों के लिए एक बड़ी खबर है. बीते साल समुद्र से कम मछली पकड़ी गई हैं. रिपोर्ट ने मछली खाने और एक्सपोर्ट करने वालों की परेशानी बढ़ा दी है. फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो सबसे ज्यादा समुद्र से पकड़ी गईं मछली ही एक्सपोर्ट होती हैं. रिपोर्ट सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMFRI), कोच्चिर ने जारी की है. रिपोर्ट में समुद्र से कम मछली पकड़े जाने के पीछे मौसम को बड़ी वजह बताया गया है. संस्थान की मानें तो साल 2023 के मुकाबले 2024 में दो फीसद मछली कम पकड़ी गई हैं.
साल 2023 में 35.3 लाख टन मछली समुद्र से पकड़ी गईं थी.
साल 2024 में 34.5 लाख टन मछली समुद्र से पकड़ी गईं थी.
साल 2024 में समुद्र से 80 हजार टन मछली कम पकड़ी गई हैं.
गुजरात, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और गोवा में मछली पकड़ने का आंकड़ा कम हो गया है.
महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और तमिलनाडू में मछली पकड़ने का आंकड़ा बढ़ गया है.

CMFRI का कहना है कि समुद्र से कम मछली पकड़ जाने की वजह समुद्र में आने वाले चक्रवात हैं.
CMFRI के मुताबिक दाना, फेंगल, रेमल और अस्ना चक्रवात के चलते कम मछली पकड़ी गई हैं.
आंध्र प्रदेश और केरल में बढ़ती गर्मी के चलते मछुआरे मछली पकड़ने समुद्र में नहीं गए.
गुजरात में साल 2023 में 8.23 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
गुजरात में साल 2024 में 7.54 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
कर्नाटक में साल 2023 में 6.04 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
कर्नाटक में साल 2024 में 4.00 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
आंध्र प्रदेश में साल 2023 में 1.90 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
आंध्र प्रदेश में साल 2024 में 1.75 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
केरल में साल 2023 में 6.33 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
केरल में साल 2024 में 6.10 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
पश्चिम बंगाल में साल 2024 में 2.33 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
पश्चिम बंगाल में साल 2023 में 1.73 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
उड़ीसा में साल 2024 में 1.54 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
उड़ीसा में साल 2023 में 1.30 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
महाराष्ट्र में साल 2024 में 3.11 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
महाराष्ट्र में साल 2023 में 2.11 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
तमिलनाडू में साल 2024 में 6.79 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
तमिलनाडू में साल 2023 में 5.65 लाख टन मछली पकड़ी गईं.
समुद्र से मछली पकड़ने पर मौसम का असर साफ-साफ देखा जा सकता है. बड़े चक्रवात को छोड़ दें तो जलवायु परिवर्तन का असर भी समुद्री मछलियों पर होने लगा है. CMFRI की ही साल 2024 की रिपोर्ट देखें तो मौसम का असर समुद्र की तलहटी तक हो रहा है. इसलिए वक्त रहते अलर्ट होने की जरूरत है.
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