आशा कार्यकर्ताओं की फाइल फोटो।
मदन पांचाल, गाजियाबाद। स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं, बीमारियों की रोकथाम को स्क्रीनिंग और सुरक्षित प्रसव जैसे कार्यक्रमों में अहम भूमिका निभाने के लिये गली-मौहल्लों और गांव की चौपालों तक तैनात की गईं आशा कार्यकर्ताओं की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ रही है।
मंडलायुक्त स्तर पर 29 दिसंबर को हुई समीक्षा बैठक में पता चला है कि मेरठ मंडल में तैनात कुल 815 आशा कार्यकर्ताओं की प्रगति बेहद खराब है। जननी सुरक्षा योजना के तहत उक्त कार्यकर्ताओं का भुगतान शून्य पाया गया है।
इनमें बुलंदशहर की 235, मेरठ की 218, हापुड़ की 101, गाजियाबाद की 96,बागपत की 92 और गौतमबुद्ध नगर की 73 आशा कार्यकर्ता शामिल हैं। इनमें से 721 को नोटिस जारी किये गये हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
सर्वे भी मिला कमजोर
मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, बीमारियों की स्क्रीनिंग और सुरक्षित प्रसव जैसे अहम कार्यक्रमों में अपेक्षित योगदान न मिलने पर विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। सभी चिन्हित आशा कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर दिए गए हैं और समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर घर-घर सर्वे, गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, प्रसव पूर्व जांच (एएनसी), टीकाकरण फॉलोअप और बीमारी रिपोर्टिंग जैसे कार्यों में लापरवाही बरती गई।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका केवल आंकड़े भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि गली-मोहल्लों और गांवों में स्वास्थ्य संदेश पहुंचाने, जोखिम की पहचान और समय पर रेफरल उनकी जिम्मेदारी है। कमजोर प्रदर्शन से न केवल योजनाओं का लक्ष्य प्रभावित होता है, बल्कि जनस्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है।
नोटिस का जवाब तय समय में लिया जाए और सुधार न होने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जिन आशा कार्यकर्ताओं की प्रगति लगातार कमजोर रही है, उनके क्षेत्रों में री-मैपिंग, पुनः प्रशिक्षण और वैकल्पिक तैनाती जैसे कदम भी विचाराधीन हैं, ताकि सेवाओं की निरंतरता बनी रहे।
स्वास्थ्य विभाग में आशा की भूमिका
आशा (एक्रेडिटिड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट ) गांव और वार्ड स्तर की सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता होती हैं।गर्भवती महिलाओं की पहचान, एएनसी और पीएनसी, सुरक्षित संस्थागत प्रसव में सहयोग, टीकाकरण, परिवार नियोजन और रोग स्क्रीनिंग उनकी प्रमुख जिम्मेदारियां हैं।आशा प्रोत्साहन आधारित मानदेय पर कार्य करती हैं। प्रदर्शन कमजोर होने पर चेतावनी, प्रशिक्षण या सेवा समाप्ति का प्रविधान है।
आशा कार्यकर्ताओं के काम में सुधार को संबंधित को नोटिस जारी किया गया है। सुधार न होने पर संबंधित की सेवा समाप्त की जाएंगी।
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- डॉ. अखिलेश मोहन, सीएमओ |