आरडीसी में पानी की लाइन डालने के बाद दुबारा उखाड़ने का काम करते कामगार। जागरण
हसीन शाह, गाजियाबाद। राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (आरडीसी) में पेयजल पाइपलाइन डालने में बरती जा रही अनियमितता का जांच कराई गई है। नियमों को दरकिनार कर पेयजल लाइन डाली जा रही थी। कई जगह को एक फीट की गहराई पर ही पाइपलाइन को डाल दिया गया। जबकि तीन फीट की गहराई पर पाइपलाइन डाली जानी चाहिए।
दैनिक जागरण की खबर का संज्ञान लेकर नगर निगम के जलकल विभाग ने पेयजल लाइन को उखाड़कर दोबारा से डालने का आदेश दिया है। ठेकेदार ने डाली गई लाइन को उखाड़ने का काम शुरू कर दिया गया है।
82 लाख से 3800 मीटर पेयजल लाइन डलवा रहा है निगम
आरडीसी को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा विकसित किया गया था। वर्तमान में आरडीसी जिले का सबसे बड़ा व्यवसायिक केंद्र है। यहां राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दफ्तर हैं। दो मॉल, बड़ी संख्या रेस्टोरेंट और शोरूम हैं। प्रतिदिन यहां 15 से 20 हजार लोग आते-जाते हैं। इस क्षेत्र में पेयजल लाइन नहीं है। यहां निगम 15वें वित्त के 82 लाख रुपये से 3800 मीटर पेयजल लाइन डलवा रहा है।
इस लाइन से 600 भवनों को कनेक्शन दिए जाएंगे। लाइन डालने में लापरवाही बरती जा रही थी। नियमों को दरकिनार कुछ जगह पर एक से डेढ़ फीट की गहराई पर पाइपलाइन डाल दी गई। मिट्टी डालकर लाइन को दबाने के बाद सीमेंट कंक्रीट की सड़क बनाई जा रही थी। दैनिक जागरण ने 13 जनवरी के अंक में काम में बरती जा रही अनियमितता को प्रमुखता से उजागर किया ।
खबर का संज्ञान लेकर जलकल विभाग के जीएम ने ठेकेदार को नोटिस जारी कराया। मौके पर अवर अभियंता को जांच के लिए भेजा। जांच में पाइपलाइन बिछाने में अनियमितता पाई गई। अब ठेकेदार को डाली गई पेयजल लाइन को उखाड़कर दोबारा से डालना होगा। बृहस्पतिवार से लाइन को उखाड़ने का काम शुरू कर दिया गया।
ज्यादा मुनाफे के चक्कर में कम गहराई पर डाली जाती है पाइपलाइन
तीन फीट गहराई में पाइपलाइन डालने पर अधिक पैसा खर्च होता है। यदि खोदाई मशीन द्वारा की जाती है तो ईंधन का पैसा बचता है। मेनुअली खोदाई करते हैं ज्यादा समय लगता है। कामगार अधिक लगाने पड़ते हैं। तीन गुना अधिक पैसा खर्च होता है। ठेकेदार अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में कम गहराई पर पाइपलाइन डालकर चले जाते हैं। बाद में आमजन को समस्याओं से जूझना पड़ता है।
कम गहराई पर पेयजल लाइन डालने के नुकसान
- भविष्य में आए दिन लीकेज की समस्या बनी रहती है
- भारी वाहनों के दबाव से लाइन के फटने का खतरा रहता है
- कई बार टेंट के पाइप गाढ़ने से भी लाइन फट जाती है
- गंदे पानी की आपूर्ति लोगों को परेशान कर देती है
कम गहराई पर लाइन डालने का नोटिस दिया गया था। अवर अभियंता को मौके पर भेजकर जांच कराई गई। जिन स्थानों पर कम गहराई पर लाइन डाली गई है वहां पर ठेकेदार को दोबारा से लाइन डालनी होगी।
-
- केपी आनंद, जीएम जलकल |
|