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पुस्तक मेले में AI का जादू... अपनी आवाज में सुनें पसंदीदा कहानियां, दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर में इतिहास और तकनीक का संगम

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विश्व पुस्तक मेले में आकर्षण का केंद्र बनी हाल नंबर दो स्थित स्टाल में वेदों की सबसे बड़ी व छोटी पुस्तकें। हरीश कुमार






संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। वर्ल्ड बुक फेयर में AI का जादू भी देखने को मिल रहा है। यहां एक AI-पावर्ड ऑडियोबुक बूथ पाठकों को खुद कहानीकार बनने का रोमांचक मौका दे रहा है। ऑनलाइन बुकस्टोर बुकस्वैगन द्वारा लगाए गए इस खास बूथ पर, सभी उम्र के पाठक अपनी आवाज में कहानियां सुनने का रोमांच महसूस कर रहे हैं। इस पहल के तहत, पाठकों को सिर्फ़ 30 सेकंड का वॉइस सैंपल रिकॉर्ड करना है।

इसके बाद, वे बुकस्वैगन के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध 100 से ज़्यादा किताबों में से कोई भी टाइटल चुन सकते हैं और फिर उस कहानी का ऑडियो वर्जन अपनी आवाज़ में सुन सकते हैं। मोबी डिक, किम, रामायण और भगवद गीता जैसी रचनाएं मेले में आने वाले लोगों को खास तौर पर आकर्षित कर रही हैं।

वर्ल्ड बुक फेयर के छठे दिन, राष्ट्रीय पठन संस्कृति के निर्माण से लेकर सैन्य बलिदानों को श्रद्धांजलि देने तक, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना का एक सार्थक संगम देखने को मिला। गुरुवार को पुस्तक मेले में प्रमुख मेहमानों में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह, मेजर जनरल (डॉ.) बिपिन बख्शी और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी शामिल थे।

पठन और पुस्तकालय विकास पर दो दिवसीय राष्ट्रीय नेतृत्व संवाद, रीडिंग इंडिया डायलॉग का उद्घाटन किया गया। इसका उद्घाटन शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने किया। उनके साथ सेतु आयोग, उत्तराखंड सरकार के उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी, शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की अतिरिक्त सचिव अर्चना शर्मा अवस्थी (IRS) और नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक युवराज मलिक भी थे।

अपने संबोधन में मलिक ने कहा कि पढ़ना किसी भी प्रगतिशील समाज की नींव है। उन्होंने सिकंदर महान, सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और नेपोलियन बोनापार्ट के जीवन से उदाहरण देते हुए बताया कि किताबें किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को आकार देने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे सोचने, सवाल करने और जिज्ञासा पैदा करने की शक्ति प्रदान करती हैं। संजय कुमार ने कहा, “किताबों से भरी दीवार से ज़्यादा सुंदर कुछ नहीं है।“ उन्होंने नागरिकों से अगले 20 सालों के भारत की कल्पना करने का भी आग्रह किया।  
भारत और ईरान की साझा साहित्यिक विरासत

इंटरनेशनल पवेलियन में “समकालीन साहित्य और ईरान और भारत के साझा सांस्कृतिक पहलू“ विषय पर एक पैनल चर्चा में, डॉ. मोहम्मद फतेहाली, डॉ. गहरेमान सोलेमानी और डॉ. सैयद अख्तर हुसैन काज़मी ने दोनों सभ्यताओं के बीच गहरे साहित्यिक और बौद्धिक संबंधों पर चर्चा की।

डॉ. फतेहाली ने फ़ारसी को एक जीवंत सभ्यता के रूप में उजागर करते हुए कहा कि ऐतिहासिक रूप से, यह भाषा भारत और ईरान को जोड़ने वाली एक कड़ी रही है, जो साहित्य के साथ-साथ प्रशासन, विज्ञान और बौद्धिक आदान-प्रदान के लिए एक माध्यम के रूप में काम करती है। उन्होंने फ़ारसी को एक शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता देने के भारत सरकार के फैसले का स्वागत किया। डॉ. सोलेमानी ने कहा कि ईरानी संस्कृति के संदर्भ के बिना भारतीय अध्ययन अधूरा है।
ट्रेड फेयर में सफल भागीदारी के लिए उपयोगी सुझावों पर पुस्तक जारी

“ट्रेड फेयर किसी देश की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी हैं। इस क्षेत्र में भारत दुनिया में 26वें स्थान पर है। अर्थव्यवस्था को एकीकृत करने के लिए, हमें \“उभरते भारत\“ के व्यापार संवर्धन प्रयासों को गति देने के लिए हर राज्य में \“भारत मंडपम\“ जैसे और अधिक प्रदर्शनी और कन्वेंशन सेंटर स्थापित करने चाहिए,” ITPO के चेयरमैन जावेद अशरफ ने ऑथर्स फोरम में “ट्रेड फेयर में भागीदारी को सफल कैसे बनाएं?“ पुस्तक जारी करते हुए कहा।

यह पुस्तक, जिसे ITPO के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी दीपक कुमार जैन और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वीना जैन ने लिखा है, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर ITPO के OSD लेफ्टिनेंट कर्नल हर्ष कोंडिलिया, प्रकाशक सुशील स्वतंत्र, ITPO के महाप्रबंधक एस.एन. भारती और वरिष्ठ प्रबंधक संजय वशिष्ठ भी उपस्थित थे।

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