नई टाटा पंच फेसलिफ्ट का रियल-वर्ल्ड क्रैश टेस्ट किया गया।
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। नई Tata Punch Facelift ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सेफ्टी के मामले में यह कार अपने सेगमेंट में बेंचमार्क क्यों मानी जाती है। इस बार कंपनी ने सिर्फ लैब टेस्ट तक सीमित न रहते हुए, एक रियल-वर्ल्ड क्रैश डेमॉन्स्ट्रेशन भी किया, जिसमें नई पंच को जानबूझकर एक खड़े ट्रक से टकराया गया।
नई Tata Punch का हुआ रियल-वर्ल्ड क्रैश टेस्ट
इस डेमॉन्स्ट्रेशन क्रैश में नई टाटा पंच ने एक स्टेशनरी ट्रक को स्पीड पर हिट किया। यह वही तरह की दुर्घटना है, जो भारतीय सड़कों पर आम तौर पर देखने को मिलती है। टक्कर के बाद जो नतीजे सामने आए, उन्होंने टाटा की सेफ्टी इंजीनियरिंग को साफ तौर पर साबित किया।
क्रैश के बाद पैसेंजर केबिन पूरी तरह सुरक्षित रहा। केबिन में किसी तरह की घुसपैठ (Intrusion) नहीं हुई। सभी दरवाजे खोले जा सके, जो स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी का अहम संकेत है। रेस्ट्रेंट सिस्टम्स ने सही तरीके से काम किया।
अंडररन प्रोटेक्शन वाले ट्रक का इस्तेमाल
इस क्रैश टेस्ट का एक खास पहलू यह था कि जिस ट्रक से टक्कर कराई गई, उसमें सही अंडररन प्रोटेक्शन बार लगा हुआ था। भारत में कई ट्रकों में यह सुरक्षा फीचर नहीं होता, जिसकी वजह से कार-ट्रक टक्करों में नुकसान ज्यादा होता है। कंपनी ने नियमों के अनुसार सुरक्षित ट्रक का इस्तेमाल कर यह दिखाया कि जब सभी रोड यूजर्स सेफ्टी नॉर्म्स का पालन करते हैं, तो गाड़ियों की सेफ्टी टेक्नोलॉजी किस तरह प्रभावी ढंग से काम करती है।
नई पंच की सेफ्टी DNA बरकरार
नई टाटा पंच में हाई-स्ट्रेंथ बॉडी स्ट्रक्चर, स्टैंडर्ड 6 एयरबैग्स, ESP और कई एक्टिव व पैसिव सेफ्टी सिस्टम्स दिए गए हैं। Bharat NCAP की 5-स्टार रेटिंग इस बात की पुष्टि करती है कि ये फीचर्स सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तविक सुरक्षा भी प्रदान करते हैं। वहीं, ट्रक से टक्कर वाला डेमॉन्स्ट्रेशन यह दिखाता है कि मुश्किल हालात में भी ये सिस्टम्स कैसे काम करते हैं।
क्रैश टेस्ट वीडियो को लेकर उठा विवाद
नई पंच के ट्रक क्रैश टेस्ट का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। कुछ लोगों ने वीडियो में ड्राइवर साइड डोर को लेकर सवाल उठाए, क्योंकि एक फ्रेम में दरवाजा डैमेज दिख रहा था और दूसरे में सही।
टाटा मोटर्स ने बताया पूरा सच
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने साफ किया कि इस पूरे क्रैश टेस्ट में सिर्फ एक ही टाटा पंच का इस्तेमाल किया गया था और टक्कर एक ही लगातार इवेंट में हुई। कंपनी के मुताबिक, भ्रम की वजह वीडियो एडिटिंग में हुई गलती थी। कंपनी ने बताया कि ड्राइवर साइड डोर और फ्रंट फेंडर पर जो डेंट दिखा, वह क्रैश के बाद निरीक्षण के दौरान लगा। इंजीनियर्स जब केबिन की मजबूती जांचने के लिए दरवाजा खोल रहे थे, उसी समय बाहरी पैनल पर हल्का कॉस्मेटिक डैमेज हुआ। वीडियो एडिटिंग के दौरान गलती से डैमेज वाला फुटेज पहले और बिना डैमेज वाला फुटेज बाद में लगा दिया गया।
इससे ऐसा लगा मानो दो अलग-अलग गाड़ियां इस्तेमाल की गई हों, जबकि ऐसा नहीं था। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वीडियो एडिटिंग की गलती के बावजूद सेफ्टी से जुड़े मुख्य नतीजे बिल्कुल नहीं बदले।
क्रैश के बाद केबिन सुरक्षित रहा। सभी दरवाजे काम करने की स्थिति में थे। स्ट्रक्चर में कोई गंभीर डिफॉर्मेशन नहीं हुआ। टाटा मोटर्स ने पारदर्शिता और इंजीनियरिंग ईमानदारी पर जोर देते हुए कहा कि ध्यान सेफ्टी परफॉर्मेंस पर होना चाहिए, न कि गलत तरीके से समझे गए विजुअल्स पर। |
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