ईडी ने जेपीएससी की द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा के दौरान नियुक्ति घोटाला में 60 आरोपितों के विरुद्ध ईसीआइआर दर्ज की है।
राज्य ब्यूरो, रांची। ईडी ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा के दौरान नियुक्ति घोटाला (मेधा घोटाला) केस में 60 आरोपितों के विरुद्ध इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआइआर) दर्ज की है।
ईडी ने सीबीआइ में दर्ज प्राथमिकी व सीबीआइ के चार्जशीट में आए तथ्यों के आधार पर पीएमएल अधिनियम के तहत आरोपितों के विरुद्ध ईसीआइआर किया है।
अब इस केस से जुड़े सभी अधिकारियों, अभ्यर्थियों, परीक्षकों व साक्षात्कार बोर्ड के सदस्यों के विरुद्ध मनी लांड्रिंग के तहत ईडी पूरे मामले की जांच करेगी। Ranchi News
हाई कोर्ट ने सीबीआइ को पूरे मामले की जांच का दिया था आदेश
JPSC द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा मेधा घोटाला मामले में सबसे पहले एसीबी ने पूरे मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की थी। इस केस में एसीबी की लंबी खिंचती जांच से असंतुष्ट होकर झारखंड हाई कोर्ट ने सीबीआइ को पूरे मामले की जांच का आदेश दिया था।
झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआइ की रांची स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने सात जुलाई 2012 को प्राथमिकी दर्ज की थी। इस केस की जांच के बाद सीबीआइ ने अक्टूबर 2024 में 60 आरोपितों के विरुद्ध भ्रष्टाचार का मामला सत्य पाया।
उनके विरुद्ध सीबीआइ की रांची स्थित विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। सीबीआइ ने अपनी चार्जशीट में आरोपितों पर नियम विरुद्ध जाकर अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ाने, कापियों की जांच में काट-छांट करने, साक्षात्कार में नंबर बढ़ाने का उल्लेख किया था।
सीबीआइ ने अपनी चार्जशीट में गुजरात के फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में कापियों में नंबर के साथ छेड़छाड़ किए जाने की पुष्टि संबंधित रिपोर्ट को लगाया था। सीबीआइ की इस चार्जशीट पर विशेष अदालत ने संज्ञान भी लिया था।
अब ईडी इस पूरे मामले की जांच कर वित्तीय लेन-देन, आरोपितों की संपत्ति आदि का आकलन करेगी, ताकि मनी लांड्रिंग के बिंदु पर पूरे मामले की जांच पूरी की जा सके।
ईडी ने इन्हें बनाया है आरोपित
जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप कुमार प्रसाद, तत्कालीन सदस्य गोपाल प्रसाद, शांति देवी, राधा गोविंद नागेश, परीक्षा नियंत्रक एलिस ऊषा रानी सिंह, सहायक समन्वय मूल्यांकन अधिकारी अरविंद कुमार सिंह, ग्लोबल इंफारमेटिक्स के प्रबंधक धीरज कुमार, अधिकारी बने अभ्यर्थी, जिनमें डीएसपी राधा प्रेम किशोर, हरिहर सिंह मुंडा, शिवेंद्र, अरविंद कुमार सिंह, विकास कुमार पांडेय, रवि कुमार कुजूर, मुकेश कुमार महतो,
राज्य प्रशासनिक सेवा के शिशिर कुमार सिंह, राजीव कुमार सिंह, रामकृष्ण कुमार, प्रमोद राम, मनोज कुमार, विनोद राम, कानू राम, प्रकाश कुमार, हरिशंकर बड़ाईक, रजनीश कुमार, संतोष कुमार चौधरी, रोहित सिन्हा, अमित कुमार, राहुल जी आनंद, वित्त सेवा के कुंदन कुमार सिंह,
मौसमी नागेश, संगीता कुमारी, शैलेश कुमार श्रीवास्तव, इंद्रजीत सिंह, सुदामा कुमार, सहकारिता पदाधिकारी कुमुद कुमार, कापी जांचने वाले परीक्षकों में बनारस हिंदु विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ओंकार नाथ सिंह, काशी विद्यापीठ के रीडर मुनिंद्र तिवारी, प्रोफेसर डाक्टर सुधीर कुमार शुक्ला,
राजेंद्र प्रसाद सिंह, डीन अमरनाथ सिंह, रांची कालेज के सहायक प्राध्यापक तुलसी नारायण सिंह मुंडा, कमला नेहरू इंस्टीच्यूट के सह प्राध्यापक डाक्टर ओम प्रकाश सिंह, काशी विद्यापीठ के रीडर डाक्टर योगेंद्र सिंह, हिंदु पीजी कालेज के प्रिंसिपल डाक्टर मिथिलेश कुमार सिंह, काशी
विद्यापीठ के डाक्टर रवि प्रकाश पांडेय, सह प्राध्यापक डा. बिंदेश्वर पांडेय, डाक्टर दिवाकर लाल श्रीवास्तव, डीएवी कालेज बनारस के सह प्राध्यापक डा. शिव बहादुर सिंह, उदय प्रताप आटोनोमस कालेज के सह प्राध्यापक डा. सियाराम सिंह यादव, काशी विद्यापीठ के प्राध्यापक रघुवीर
सिंह तोमर, महेंद्र मोहन वर्मा, डाक्टर प्रदीप कुमार पांडेय, डाक्टर मधुसूदन मिश्रा, सहायक प्राध्यापक डा. सभाजीत सिंह यादव, प्राध्यापक डा. शशि देवी सिंह, देवेंद्र पीजी कालेज के सह प्राध्यापक डा. अशोक कुमार सिंह, डीएवी पीजी कालेज के प्राध्यापक दीनानाथ सिंह, साक्षात्कार बोर्ड
के सदस्य सेवानिवृत्त उप विकास आयुक्त अलबर्ट टोप्पो, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के राजनीति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष नंद लाल व सेवानिवृत्त विशेष सचिव सोहन राम। |