औली में आक्रोश रैली निकालते खेल प्रेमी, होटल कारोबारी व स्थानीय लोग। जागरण
संवाद सहयोगी, जागरण, गोपेश्वर। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल औली में बर्फबारी न होने के कारण पर्यटकों और स्थानीय कारोबारियों में निराशा का माहौल है। यहां साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत से स्थापित स्नो मेकिंग मशीनें रखरखाव के अभाव में खराब पड़ी हैं।
इसके अलावा औली में बनाई गई कृत्रिम झील भी सूखी पड़ी है, जिससे पर्यटन कारोबार पर खासा असर पड़ा है। आई स्केटिंग रिंक भी उद्घाटन के बाद से बेकार पड़ा है। इस स्थिति से आक्रोशित स्थानीय नागरिकों ने औली के प्रवेश द्वार से नंदा देवी स्लोप तक प्रदर्शन कर \“औली बचाओ\“ मुहिम की शुरुआत की है और पुतला फूंककर विरोध दर्ज कराया।
गुरुवार को \“औली बचाओ अभियान\“ के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और औली में व्यवस्थाओं को सुचारु करने की मांग की। इस आंदोलन में नगर की जनता, पर्यटन कारोबारी, खिलाड़ी और महिलाएं भी शामिल हुए।
यूकेडी और कांग्रेस ने भी इस प्रदर्शन का समर्थन किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्नो मेकिंग मशीनों के काम न करने व बर्फबारी न होने से पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। ओपन आइस स्केटिंग रिंक भी शुभारंभ के बाद से बेकार पड़ा है।
औली में कृत्रिम झील भी बनाई गई, जिसके पानी से बर्फ बनाई जानी थी लेकिन यह झील भी सूखी पड़ी है। इससे पर्यटक उदासीन होकर औली की गलत छवि लेकर लौट रहे हैं। साथ ही स्थानीय लोगों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि औली की व्यवस्थाओं को जल्द ठीक नहीं किया गया और मशीनों को क्रियाशील नहीं बनाया गया, तो यह विरोध एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले लेगा।
इस अवसर पर व्यापार सभा के अध्यक्ष नैन सिंह भंडारी, जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती, अरुण लाल शाह, विवेक पवार, संतोष कुंवर, वैभव सकलानी, सुरभी शाह, अंशुमन बिष्ट, महेंद्र भुजवाण, कुलदीप नेगी, रवींद्र कंडारी सहित कई नागरिक शामिल रहे।
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