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मर्चेंट फ्रॉड कैसे होता है और क्या है बचने का तरीका

Chikheang 1 hour(s) ago views 262
  



नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट कस्टमर्स और बिजनेस दोनों को फायदा पहुंचा रहा है। इसने यूजर्स को मोबाइल पर बैंकिंग एक्सेस दिया और पेमेंट में ट्रांसपेरेंसी लाई। यह हमारे लिए सुविधाजनक है, लेकिन कई मामलों में चुनौतीपूर्ण भी। देश UPI ट्रांजैक्शन के नए रिकॉर्ड बना रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में मर्चेंट फ्रॉड के मामले बढ़े हैं। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार छोटे और मीडियम साइज के बिजनेस (SMBs) चलाने वाले लोगों के साथ डिजिटल पेमेंट स्कैम तेजी से बढ़ रहा है। स्कैमर्स ऑनलाइन मार्केटप्लेस, सर्विस आउटलेट और रिटेल स्टोर में व्यापारियों को ठगने के नए तरीके ढूंढ रहे हैं।

छोटे और मीडियम साइज के बिजनेस (SMBs) की ग्रोथ देश की तरक्की को दिखाती है। लेकिन स्कैमर्स से सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं को है। एक धोखाधड़ी का मामला व्यापारी के भरोसे को तोड़ सकता है। इससे वित्तीय नुकसान हो सकता है, ऑपरेशन रुक सकता है, और कुछ मामलों में चार्जबैक और अकाउंट फ्रीज हो सकते हैं। इस लेख में जानेंगे कि भारत में कितने तरह के मर्चेंट फ्रॉड होते हैं और व्यापारी खुद को कैसे बचाए:
1. UPI और QR कोड स्कैम

अगर आप अपना कोई बिजनेस चलाते हैं तो आपने UPI और QR कोड स्कैम के बारे में जरूर सुना होगा। यह भारत में छोटे बिजनेस को टारगेट करने वाले सबसे आम फ्रॉड तरीकों में से एक हैं। UPI ट्रांजैक्शन को अपनाने वाला व्यापारी हमेशा इस फ्रॉड को लेकर डर में रहता है।
कैसे होता है यह स्कैम

इसमें फ्रॉडस्टर्स विशिंग कॉल (Voice Phishing) करते हैं, असली QR कोड पर नकली QR कोड चिपका देते हैं, व्यापारियों को WhatsApp/SMS या ईमेल से शेयर करते हैं, और धोखा देने के लिए एडिट किए गए पेमेंट स्क्रीनशॉट दिखाते हैं। अक्सर यह स्कैम पीक आवर्स के दौरान होता है, जिसमें व्यापारी बिना पेमेंट प्राप्त किए सामान दे देता है।
क्या है रेड फ्लैग

- पेमेंट को “वेरिफाई“ या “रिवर्स“ करने का रिक्वेस्ट।
- स्क्रीनशॉट पर भरोसा करना।
- व्यापारी के ऑफिशियल स्टैंडी से स्कैन करने के बजाय डिजिटल रूप से मिले QR कोड का इस्तेमाल करना।
इस स्कैम से कैसे बचें

- मर्चेंट या व्यापारी को हमेशा बैंक या पेमेंट ऐप ट्रांजैक्शन वेरिफाई करना चाहिए।
- सेल पूरी करने से पहले ऑफिशियल कन्फर्मेशन का इंतजार करना चाहिए।
2. नकली ऑर्डर, फ्रेंडली फ्रॉड और चार्जबैक

ई-कॉमर्स से लाखों व्यापारी जुड़े हैं और अपने उत्पाद को देश के कोने-कोने तक पहुंचा रहे हैं। लेकिन उनके सामने नकली ऑर्डर और फ्रेंडली फ्रॉड जैसी चुनौतियां हैं, जो उन्हें नुकसान पहुंचा रही हैं।
कैसे होता है यह स्कैम

ग्राहक सामान मिलने के बाद पेमेंट पर विवाद करते हैं। कभी-कभी जानबूझकर फ्रेंडली फ्रॉड के तौर पर, तो कभी संगठित ग्रुप बड़ी संख्या में नकली ऑर्डर देता है। इसमें व्यापारियों को डिलीवर किया गया सामान गंवाना पड़ता है, साथ ही उन्हें रिफंड का खर्च, चार्जबैक फीस और पेमेंट गेटवे से पेनल्टी या कड़ी जांच का जोखिम भी उठाना पड़ता है।
क्या है रेड फ्लैग

- असामान्य दिखने वाला ऑर्डर पैटर्न।
- अपरिचित क्षेत्र या नए क्षेत्र से ऑर्डर में अचानक बढ़ोतरी।
- पर्सनल इंफॉर्मेशन में गलत जानकारी देना।
- फास्ट शिपिंग के लिए लगातार रिक्वेस्ट करना।
इस स्कैम से कैसे बचें

-ट्रांजैक्शन डिटेल्स के साथ ऑर्डर/शिपिंग का कन्फर्मेशन प्राप्त करें।
- मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूरी है।
- धोखे वाले क्लेम और पेमेंट विवादों के लिए स्पष्ट रिफंड पॉलिसी और मजबूत डॉक्यूमेंटेशन करें।
3. आइडेंटिटी और KYC फ्रॉड

KYC अपडेट के नाम पर कई फ्रॉड किए जाते हैं। इस चीज से डिजिटल पेमेंट को अपनाने वाले व्यापारी परेशान हैं, जहां उनकी आइडेंटिटी और पर्सनल डेटा का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता हैं।
कैसे होता है यह स्कैम

फ्रॉडस्टर्स जाली दस्तावेजों या चोरी किए गए बिजनेस क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके नकली मर्चेंट अकाउंट बनाते हैं। ये अकाउंट अक्सर असली लगते हैं, जिससे ऑथराइज्ड विड्रॉल और फेक रिफंड जैसे और भी फ्रॉड हो सकते हैं। आइडेंटिटी के गलत इस्तेमाल से व्यापारियों का बिजनेस प्रभावित होता है। रेगुलेटरी जांच और ऑपरेशनल रुकावटें पैदा होती हैं। साथ ही, बिजनेस की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान हो सकता है।
क्या है रेड फ्लैग

-एक ही फोन नंबर, ईमेल एड्रेस या फिजिकल एड्रेस का इस्तेमाल करने वाले कई मर्चेंट का होना।
-अक्सर डॉक्यूमेंट जाली, बदले हुए या खराब तरीके से स्कैन किए हुए लगते हैं और उनमें वॉटरमार्क जैसे स्टैंडर्ड सिक्योरिटी फीचर्स नहीं होते हैं।
इस स्कैम से कैसे बचें

- मर्चेंट ऑनबोर्डिंग के समय बिजनेस ऑनर का फिजिकल वेरिफिकेशन हो।
- डेटा की डुप्लीकेट कॉपी को पहचानना और हटाना।
- सिक्योर डिजिटल सिग्नेचर के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से डिजिटल डॉक्यूमेंट्स को ऑथेंटिकेट करना। इस तरह के स्टैंडर्ड PhonePe जैसे भरोसेमंद पार्टनर फॉलो करते हैं।
4. आधार कार्ड फ्रॉड

भारत में आधार कार्ड फ्रॉड इसलिए होता है क्योंकि फ्रॉडस्टर्स नकली पहचान के लिए इसके डेटा का इस्तेमाल करते हैं। इस फ्रॉड के आम तरीकों में यूजर्स को OTP शेयर करने के लिए धोखा देना, बायोमेट्रिक्स की कॉपी बनाना, नकली सेवाओं के लिए चोरी किए गए आधार कार्ड का इस्तेमाल करना शामिल है।
कैसे होता है यह स्कैम

स्कैमर्स संवेदनशील जानकारी चुराने के लिए नकली वेबसाइट, विशिंग कॉल, फिशिंग लिंक और सिम-स्वैप हमलों के जरिए आधार से जुड़े डॉक्यूमेंट का गलत फायदा उठाता है। एक बार जानकारी लीक होने के बाद, स्कैमर्स बिना इजाजत के ट्रांजैक्शन शुरू कर सकते हैं। नकली अकाउंट खोल सकते हैं, या मनी लॉन्ड्रिंग के लिए शेल कंपनियों में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें वित्तीय नुकसान के अलावा, व्यापारियों को संभावित रेगुलेटरी और कानूनी कार्यवाही से जूझना पड़ सकता है।
क्या है रेड फ्लैग

बैंक अधिकारी या सर्विस प्रोवाइडर बनकर स्कैमर्स तुरंत आधार कार्ड से जुड़ी डिटेल्स को “वेरिफाई“ या “अपडेट“ करने के लिए दबाव डालते हैं।
इस स्कैम से कैसे बचें

- API-बेस्ड KYC के साथ ऑफिशियल-चैनल आडेंटिटी वेरिफिकेशन करना।
- लाइव फोटो चेक आधार कार्ड से जुड़े फ्रॉड के खिलाफ सबसे मजबूत बचाव है।
5. इनवॉइस स्कैम

इनवॉइस मैनिपुलेशन छोटे और मीडियम साइज के बिजनेस के लिए एक बढ़ता हुआ खतरा है। इसमें स्कैमर्स जालसाजी के लिए कई तरीके अपनाते हैं, जिससे इनवॉइस रियल लगे।
कैसे होता है यह स्कैम

स्कैमर्स भरोसेमंद वेंडर या एग्जीक्यूटिव बनकर नकली इनवॉइस भेजते हैं, या अपडेटेड बैंक डिटेल्स देते हैं। कुछ मामलों में पेमेंट इंस्ट्रक्शन बदल देते हैं। यह खतरा बिजनेस के अंदर से भी आता है, क्योंकि बिलिंग एक्सेस वाले कर्मचारी इनवॉइस में हेरफेर कर सकते हैं या पर्सनल फायदे के लिए फंड को डायवर्ट कर सकते हैं।
क्या है रेड फ्लैग

- इनवॉइस में खराब क्वालिटी के लोगो, अजीब फॉन्ट, लो-रेज टेम्प्लेट, टाइपिंग की गलतियां।
- गलत या संदिग्ध GSTIN/टैक्स ID, बदले हुए बैंक डिटेल्स।
- राउंड नंबर्स, डुप्लीकेट इनवॉइस, या अजीब बिलिंग पैटर्न।
इस स्कैम से कैसे बचें

- कोई भी ट्रांजैक्शन करने से पहले, सप्लायर का फिजिकल एड्रेस, फोन नंबर और टैक्स आइडेंटिफिकेशन कन्फर्म करें।
- पेमेंट के सिक्योर चैनल का इस्तेमाल करें।
- ऑटोमेटेड रिकंसिलिएशन टूल्स किसी मर्चेंट को इनवॉइस मैनिपुलेशन से होने वाले नुकसान को काफी कम कर सकते हैं।
6. फिशिंग, स्मिशिंग और मैलवेयर अटैक

ये सबसे आम ऑनलाइन खतरे हैं। इसमें स्कैमर्स संवेदनशील डेटा चुराने के लिए मानव मनोविज्ञान और कम्युनिकेशन चैनलों (ईमेल, SMS, वॉइस) का फायदा उठाते हैं। डिजिटाइजेशन और मोबाइल यूजर्स की बढ़ती संख्या की वजह से भारत में इस तरह के स्कैम बढ़ रहे हैं।
कैसे होता है यह स्कैम

स्कैमर्स बैंक या पेमेंट प्लेटफॉर्म की नकल करके नकली ईमेल, मैसेज या स्मिशिंग अलर्ट भेजते हैं ताकि UPI PIN, लॉगिन डिटेल्स या डिवाइस एक्सेस चुरा सकें। ये मैसेज अक्सर असली लगते हैं, जिन्हें अर्जेंट KYC अपडेट या रिवॉर्ड नोटिफिकेशन के तौर पर दिखाया जाता है। मैसेज व्यापारियों को मैलवेयर से इन्फेक्टेड ऐप्स या वेबसाइट्स पर भी भेज सकते हैं। एक बार जब क्रेडेंशियल्स एक्सपोज हो जाते हैं, तो स्कैमर्स पेमेंट डैशबोर्ड और दूसरी जरूरी बिजनेस जानकारी तक पहुंच सकते हैं।
क्या है रेड फ्लैग

-फाइनेंशियल ट्रांसफर या संवेदनशील डेटा के लिए हाई-प्रेशर डिमांड करना।
- पैनिक पैदा करने वाले मैसेज जैसे ‘2 घंटे में अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा’।
- असामान्य टोन में भेजा गया कम्युनिकेशन।
इस स्कैम से कैसे बचें

- छोटे व्यापारियों को अनजान मैसेज से सावधान रहना चाहिए।
- सभी रिक्वेस्ट को वेरिफाई करना चाहिए।
- कोई भी कॉन्फिडेंशियल जानकारी जैसे UPI पिन, CVV, या OTP कभी भी शेयर नहीं करनी चाहिए, भले ही मैसेज कितना भी असली क्यों न लगे।

छोटे और मध्यम आकार के बिजनेस (SMBs) भारत के लिए जरूरी हैं क्योंकि वे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करते हैं और देश की GDP में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में आवश्यक है कि उनके बिजनेस को आगे ले जाने के लिए ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं दी जाए। साथ ही, स्कैमर्स से बचाने के लिए उन्हें जागरूक किया जाए। पेमेंट प्लेटफॉर्म जैसे PhonePe व्यापारियों को नए स्कैम के तरीकों के बारे में बताने के लिए इन-ऐप सिक्योरिटी अलर्ट देते हैं। यह प्लेटफॉर्म कभी भी कॉल या मैसेज के जरिए सेंसिटिव जानकारी नहीं मांगता है।

अगर आप SMBs हैं और आपके साथ कोई स्कैम होता है या स्कैम होने का संदेह है तो आप कुछ बातों पर ध्यान दें:

- सबसे पहले पैनिक में न आएं और समझदारी से काम लें।

- बैंक या पेमेंट प्रोवाइडर को उनकी ऑफिशियल वेबसाइट या ऐप पर दी गई डिटेल्स का इस्तेमाल करके कॉल करके जानकारी दें।

- डॉक्यूमेंटेशन बहुत जरूरी है इसलिए मैसेज, लिंक, कॉलर ID या किसी भी संदिग्ध गतिविधि का स्क्रीनशॉट लें।

- पेमेंट प्रोवाइडर को घटना की तुरंत रिपोर्ट करें ताकि वे मर्चेंट का अकाउंट सुरक्षित कर सकें।

- PhonePe पर रिपोर्टिंग के लिए ऐप के हेल्प सेक्शन में जाएं और शिकायत दर्ज करें या PhonePe कस्टमर केयर: 80-68727374 / 022-68727374 पर कॉल करें।

- PhonePe के Twitter पर रिपोर्टिंग के लिए PhonePe Support और Facebook पर रिपोर्टिंग के लिए PhonePe Official पर जाएं।

- शिकायत निवारण: PhonePe शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

- नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें।

- अगर इस बात की कोई संभावना है कि डेटा या इनवॉइस लीक हुए हैं, तो कस्टमर्स को सूचित करें।

- पासवर्ड और PIN बदलें, सभी डिवाइस से लॉग आउट करें, और रिव्यू करें कि बिजनेस अकाउंट तक किसकी पहुंच है।

(Disclaimer: यह आर्टिकल ब्रांडेड डेस्क द्वारा लिखा गया है। इस लेख में व्यक्त किए गए विचार जागरण न्यू मीडिया कंपनी के विचारों को नहीं दर्शाते हैं। इसमें दिया गया कॉन्टेंट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी निर्णय लेने से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। जागरण न्यू मीडिया कंपनी जानकारी की सटीकता की गारंटी नहीं देती है।
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