जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। जिले में चौथे दिन भी सर्दी का प्रकोप जारी है। सुबह के समय कोहरा झरने की तरह बरसता महसूस हुआ। आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। सुबह की सैर को पार्कों में पहुंचने वालों की संख्या भी घट गई है।
हालांकि न्यूनतम तापमान में मामूली उछाल जरूर आया है। बुधवार को न्यूनतम तापमान 4.0 डिग्री सेल्सियस रहा था, इससे पहले सोमवार को 2.1 डिग्री सेल्सियस था। जबकि गुरुवार को यह बढ़कर 6.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। गुरुवार की सुबह से ही शीत लहर का प्रभाव भी बना रहा। इसकी वजह से कामकाज के सिलसिले में बाहर निकलने वालों को कठिनाई झेलनी पड़ रही है। खासकर दोपहिया वाहन चलाना मुश्किल हो गया है।
लोग गर्म कपड़ों में लिपटकर जा रहे हैं, लेकिन कंपकंपी छूट रही है। सर्दी से बचाव के लिए लोग अलाव सेंकते नजर आ रहे हैं। वहीं, मेरठ रोड स्थित कमला नेहरू वाटिका और महावीर चौक के निकट जीआइसी के मैदान समेत गांधी कालोनी की गांधी वाटिका में सुबह की सैर को पहुंचने वालों की संख्या में भी कमी आ रही है।
जगह-जगह अलाव में नागरिक तापते रहे। सर्दी का असर बाजारों पर भी पड़ा है। बाजारों में गर्म कपड़ो की अधिक खरीदारी हुई, जबकि अन्य उत्पाद की बिक्री कम हुई है।
कड़ाके की सर्दी में लोग घरों से बाहर निकलने में हिचक रहे हैं। गन्ना शोध संस्थान में स्थापित मौसम केंद्र के कार्यवाहक प्रभारी केशव कुमार का कहना है कि अगले दो दिन सर्दी और बढ़ सकती है तथा बहुत घना कोहरा छाए रहने की भी संभावना है।
पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट
शीतलहर में किसान और पशुपालकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पशुपालकों के लिए हरे चारे का प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण बना है। शीतलहर में खेतों में काम करने का समय भी कम हो गया है। सुबह देरी से किसान खेतों में पहुंच रहे हैं और शाम को जल्दी घर लौट रहे हैं।
कार्यक्षमता भी प्रभावित हैं। वहीं गन्ना, गेहूं, सरसों, आलू समेत सब्जी फसलों पर मौसम का प्रभाव पड़ रहा है। गेहूं और सरसों की फसल सर्दी से लहलहा रही है, जबकि गन्ने में रिकवरी कम हो रही है। आलू, चना, बैंगन की फसल में रोग की आशंका बढ़ गई है, जबकि पालक, मेथी, गोभी, गाजर की फसल के लिए मौसम अनुकूल हैं। |