सहरसा-मानसी रेलखंड दोहरीकरण की डीपीआर में संशोधन
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। सहरसा से मानसी के बीच प्रस्तावित रेललाइन दोहरीकरण परियोजना को लेकर एक अहम पहल की गई है। समस्तीपुर रेल मंडल ने इस परियोजना की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में बड़ा संशोधन करते हुए लागत को काफी कम कर दिया है।
पहले जहां इस योजना का बजट करीब 1000 करोड़ रुपये तय किया गया था, वहीं अब इसे घटाकर 500 करोड़ रुपये से भी कम कर दिया गया है। संशोधित और किफायती डीपीआर दिसंबर माह में रेलवे बोर्ड को भेजी जा चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, पहले भेजी गई डीपीआर में विद्युतीकरण, प्लेटफॉर्म उन्नयन, पुल, अंडरपास, आरओबी निर्माण और रेलवे फाटकों के आधुनिकीकरण जैसे कई कार्य शामिल थे। इन्हीं अतिरिक्त प्रविधानों के कारण परियोजना की लागत काफी बढ़ गई थी और रेलवे बोर्ड से वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पा रही थी।
इसी वजह से रेल मंडल ने रणनीति बदलते हुए केवल रेललाइन दोहरीकरण पर फोकस किया है। बाकी कार्यों को भविष्य में चरणबद्ध तरीके से कराने की योजना है। गौरतलब है कि सहरसा–मानसी के बीच करीब 41 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड पर फिलहाल सिंगल लाइन होने के कारण ट्रेनों के संचालन में दिक्कतें आती हैं।
प्रतिदिन यहां लगभग 45 जोड़ी यात्री ट्रेनें और 10 से 12 जोड़ी मालगाड़ियां गुजरती हैं। सिंगल ट्रैक पर अधिक ट्रैफिक के कारण कई बार ट्रेनों को रास्ते में रुकना पड़ता है, जिससे समय पर संचालन प्रभावित होता है। दोहरीकरण के बाद इस समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
परियोजना पूरी होने पर सोनबरसा कचहरी स्टेशन पर सात लाइनें, बदला घाट पर आठ लाइनें, धमारा घाट, कोपरिया और सिमरी बख्तियारपुर में पांच-पांच लाइनें उपलब्ध होंगी। वहीं परमिनिया, बाबा रघुनी और फनगो हाल्ट पर दो-दो लाइनें बनाई जाएंगी।
फिलहाल, इस रेलखंड पर ट्रेनों की अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा है, लेकिन सिंगल लाइन के कारण ट्रेनें अपनी निर्धारित गति से नहीं चल पाती हैं। दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की आवाजाही सुचारू होगी और यात्रियों को समय पर गंतव्य तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी।
मंडल स्तर पर डीपीआर के वित्तीय पुनरीक्षण बाद 500 करोड़ से कम खर्च की डीपीआर तैयार कर रेलवे बोर्ड को दुबारा स्वीकृति के लिए भेजी है। मंडल स्तर पर प्रयास है कि सहरसा- मानसी रेलखंड पर रेललाइन का दोहरीकरण हो जाय। अन्य सब्सिडियरी कार्य बाद में चरणबद्ध रूप से किया जाएगा। - ज्योति प्रकाश मिश्रा, डीआरएम |