भुवनेश्वर एयरपोर्ट(फाइल फोटो)
शेषनाथ राय, भुवनेश्वर। भुवनेश्वर स्थित बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अब सोना और नशे के तस्करों के लिए बड़ा ट्रांजिट प्वाइंट बनता जा रहा है। कभी कार्गो के जरिए मारिजुआना तो कभी यात्रियों के मलद्वार में छिपाकर लाया जा रहा सोना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। कड़े सुरक्षा इंतजाम, मेटल डिटेक्टर और अत्याधुनिक स्कैनर होने के बावजूद माफिया नए-नए तरीकों से जांच को चकमा दे रहे हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले चार वर्षों में एयरपोर्ट पर जांच के दौरान करीब 110 किलो सोना जब्त किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत 150 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा 5 करोड़ रुपये की 2 क्विंटल चांदी और करीब 80 करोड़ रुपये मूल्य की 80 किलो मारिजुआना भी जब्त की जा चुकी है। यही नहीं, वन्यजीव तस्करी के तहत पशु-पक्षियों के नाखून, खाल और सींग की अवैध तस्करी के मामले भी सामने आए हैं।
इस साल भी जारी है तस्करी
चालू वर्ष की शुरुआत से अब तक करीब 8 करोड़ रुपये मूल्य की 8 किलो मारिजुआना जब्त की जा चुकी है। वर्ष 2025 में ही सात अलग-अलग मामलों में 72 करोड़ रुपये की मारिजुआना पकड़ी गई थी।7 जनवरी 2025 को सीमा शुल्क विभाग ने पश्चिम बंगाल की दो महिलाओं से 9.524 किलो मारिजुआना (कीमत करीब 10 करोड़ रुपये) बरामद की थी।
इसके एक सप्ताह बाद डीआरआई और कस्टम विभाग ने एक केरल निवासी के पास से बिस्किट पैकेट में लाई जा रही 4 किलो मारिजुआना जब्त की। इसके अलावा बैंकॉक से लाई जा रही और अन्य मामलों में भी करोड़ों रुपये की नशीली खेप पकड़ी गई।
सोने की बड़ी खेप भी पकड़ी गई
28 अगस्त 2024 को सिटी एवं जीएसटी विभाग ने छापेमारी कर भुवनेश्वर एयरपोर्ट से 87 किलो सोना और 200 किलो चांदी जब्त की थी, जिसकी कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई। मुंबई से भुवनेश्वर आ रही दो उड़ानों के जरिए यह खेप लाई जा रही थी, जिसे एयरपोर्ट के बाहर दो लॉजिस्टिक्स वाहनों से बरामद किया गया।
इसी तरह, 8 मई को दुबई से आए चार यात्रियों के मलद्वार से कैप्सूल में छिपाकर लाया गया 4 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का तरल सोना डीआरआई ने जब्त किया। अप्रैल में घरेलू कार्गो टर्मिनल से भी करोड़ों रुपये का सोना पकड़ा गया था।
लगातार बढ़ रही चुनौती
आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि भुवनेश्वर एयरपोर्ट तस्करों के नेटवर्क में तेजी से अहम कड़ी बनता जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह चुनौती लगातार बढ़ रही है कि किस तरह इन संगठित माफियाओं की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए। |
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