राज्य ब्यूरो, लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के जिले के भीतर स्थानांतरण और समायोजन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा लगाई गई रोक फिलहाल जारी है। अब इस मामले में 19 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर शिक्षकों और विभाग दोनों की नजरें टिकी हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग ने 14 नवंबर को शिक्षकों के समायोजन से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके तहत जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समितियां शिक्षक-विहीन और एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में शिक्षकों का समायोजन कर रही थीं। कई जिलों में यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी, लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद पूरी प्रक्रिया पर रोक लग गई।
समायोजन से जुड़े शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर भी अपलोड किया जा चुका था। अब विभाग यह जानकारी जुटा रहा है कि रोक लगने से पहले कितने शिक्षकों का समायोजन किया जा चुका है और किन जिलों में प्रक्रिया अधूरी रह गई है।
याचिकाकर्ता शिक्षकों की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि समायोजन से उनकी वरिष्ठता प्रभावित हो रही है और इससे कई प्रशासनिक विसंगतियां पैदा हो रही हैं। इन आपत्तियों को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल समायोजन पर रोक लगाते हुए बेसिक शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया है।
उधर, बेसिक शिक्षा विभाग कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए जवाब और दस्तावेज तैयार कर रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगली सुनवाई में पूरी स्थिति कोर्ट के सामने रखी जाएगी।
प्रदेश में वर्तमान में करीब 508 परिषदीय विद्यालय केवल एक शिक्षा मित्र के सहारे संचालित हो रहे हैं, जबकि लगभग 1600 विद्यालय ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक ही शिक्षक तैनात है। इसी पृष्ठभूमि में समायोजन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। |
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