
सट्टा क्या है और कहाँ से शुरू हुआ सट्टा या स्पेक्युलेशन जुए का एक रूप माना जाता है, जिसकी पहचान 1960 के दशक में मुंबई में “मटका” के नाम से बनी। इस खेल में 00 से 100 तक के अंकों में से किसी एक पर अनुमान लगाया जाता है और तय समय पर एक अंक घोषित होता है। अनुमान सही बैठने पर जीत मिलती है, जबकि गलत होने पर पूरी रकम डूब जाती है। समय के साथ यह खेल ऑफलाइन से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच गया।जीत का लालच और हाई रिस्क रियलिटीसट्टा बाजार में जीत की रकम आकर्षक दिखाई जाती है, जहां सही नंबर आने पर लगाई गई रकम का कई गुना मिलने का दावा किया जाता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि जीत की संभावना बेहद कम होती है और अधिकांश लोग हार का सामना करते हैं। यही वजह है कि यह खेल आर्थिक नुकसान और लत का कारण बनता रहा है, जिसका असर परिवारों और सामाजिक जीवन पर भी पड़ा है।कौन होता है “Satta King”सट्टा बाजार में “सट्टा किंग” उस व्यक्ति या नेटवर्क को कहा जाता है जो अलग-अलग समय पर नंबर घोषित करता है। अलग-अलग बाजारों के समय और तरीके होते हैं, लेकिन पूरी प्रक्रिया अनौपचारिक और गैर-पारदर्शी रहती है। एजेंट या पंटर इन नंबरों पर दांव लगवाते हैं, जबकि आम खिलाड़ी जोखिम उठाता है।इंडिया में सत्ता क्यों इललीगल है?भारत में सट्टा, जुआ और शर्तबाज़ी कानूनन अपराध की श्रेणी में आते हैं। भारतीय कानून के तहत इस तरह की गतिविधियों पर सजा का प्रावधान है। ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म्स पर भी कार्रवाई होती है, लेकिन कई वेबसाइट्स विदेशी सर्वर से संचालित होने के कारण जांच और नियंत्रण चुनौतीपूर्ण बन जाता है। कानून के अलावा, सामाजिक और आर्थिक नुकसान की वजह से भी सट्टेबाजी को हतोत्साहित किया जाता है।लीगल वार्निंग और सोशल इम्पैक्टविशेषज्ञों का मानना है कि सट्टा सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक संतुलन का भी नुकसान करता है। लालच और त्वरित मुनाफे की उम्मीद में लोग बार-बार जोखिम लेते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकती है।Disclaimer: देश में सट्टेबाजी और जुआ खेलना गैरकानूनी है। इसमें जीत-हार की कोई गारंटी नहीं होती और यह पूरी तरह जोखिम भरा है। यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। NPG News किसी भी प्रकार की सट्टेबाजी को बढ़ावा नहीं देता। |