मंदार महोत्सव : भगवान मधुसूदन ने नगर भ्रमण किया।
संवाद सहयोगी, बौंसी (बांका)। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बुधवार को भगवान मधुसूदन की भव्य शोभायात्रा पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। हर-हर शंभू और भगवान मधुसूदन के जयकारों से बौंसी और मंदार क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया। पंडा समाज, बगडुंबा ड्योढ़ी एवं धरमरक्षिणी महासभा की अगुवाई में सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए यह शोभायात्रा निकाली गई।
मकर संक्रांति पर निकली भगवान मधुसूदन की शोभायात्रा
मान्यता है कि मधु-कैटभ दैत्य को दिए गए वरदान के कारण भगवान मधुसूदन वर्ष में एक बार मकर संक्रांति के दिन भक्तों को दर्शन देने धरती पर अवतरित होते हैं। दोपहर में भगवान मधुसूदन को मंदिर से गरुड़ रथ पर सवार कर शोभायात्रा निकाली गई। रथ के आगे गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़े और महात्मा भोली बाबा की संकीर्तन मंडलियां चल रही थीं। पीले पताकाओं के साथ नाचते-गाते श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। शोभायात्रा में समुद्र मंथन और राम दरबार की आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं।
जयकारों से गूंज उठा मंदार
बिहार के साथ-साथ झारखंड और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यात्रा मंदार पर्वत पहुंची, जहां पापहरणी सरोवर के पवित्र जल से भगवान का स्नान कराया गया। इसके बाद अवंतिका नाथ और फगदोल में भगवान के दर्शन कर भक्तों ने सुख-समृद्धि की कामना की।
चार घंटे के भ्रमण के बाद पहुंचे मंदिर
करीब चार घंटे के भ्रमण के बाद भगवान पुनः मंदिर लौटे। मकर संक्रांति पर पंचामृत अभिषेक, दही-चूड़ा, तिलकुट, गुड़ व मिठाई का भोग भगवान को अर्पित किया गया। इस अवसर पर मुख्य पार्षद कोमल भारती, कैलाश सिंह,मंटू सिंह, पंडित अवधेश ठाकुर, शंकर सिंह, राजीव कुमार ठाकुर, धीरज सिंह, सुवंश ठाकुर आदि उपस्थित थे।
भक्तों ने मांगे आशीर्वाद
भगवान मधुसूदन से अशीर्वाद लेने के लिए काफी संख्या में भक्त सड़क के दोनों ओर कतार में खड़े थे। जिस जगह से भगवान गुजरते थे, उस जगह सभी भक्त हाथ जोड़कर खड़े थे। लोग फूल बरसा रहे थे। इस दौरान कई लोग श्रद्धालुओं की सेवा कर रहे थे। बाद में खिचड़ी का भोग लगाया गया। |