जागरण संवाददाता, पीलीभीत। जिला अस्पताल में डाक्टरों की लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां मरीज की मौत के बाद भी नियमों और जिम्मेदारी की खुलेआम अनदेखी की गई। अस्पताल की इमरजेंसी तैनात डाक्टर के मौके पर पहुंचे बिना ही रजिस्टर में उनका नाम दर्ज कर दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि संबंधित डाक्टर का साफ कहना है कि वह उस समय अस्पताल में मौजूद ही नहीं थे। कागजों में मौजूदगी और हकीकत में गैरहाजिरी का यह विरोधाभास ने सवाल खड़े कर दिए।
राजेश की तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में किया था भर्ती
शहर के शेरोंवाली मठिया निवासी राजेश की तबीयत बिगड़ने पर मंगलवार रात को स्वजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। इमरजेंसी में भर्ती करके डा. हेमंत ने प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन मरीज की जान नहीं बचाई जा सकी। इसके बाद राजेश को मृत घोषित कर दिया। इमरजेंसी में तैनात डा. केके भट्ट की भी ड्यूटी लगाई गई थी। इसी बीच मृतक के दस्तावेज तैयार किए गए, जिसमें डा. हेमंत ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं, डा. केके भट्ट वहां मौजूद नहीं होने के बाद भी उनके हस्ताक्षर कर दिए गए।
यह हैरानी तब हुई जब पता चला कि जिस डा. केके भट्ट की इमरजेंसी में ड्यूटी चार्ट के अनुसार तैनाती थी, वह उस समय जिला अस्पताल के बजाय महिला अस्पताल में मौजूद थे। जब उनसे फोन काल पर बात की गई तो उनसे मृतक के बारे में जानकारी मांगी तो उन्होंने स्पष्ट रूप से मृतक के बारे में जानकारी होने से इनकार कर दिया।
उन्हें ऐसे किसी मरीज के बारे में कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, जब उन्हें बताया गया कि इमरजेंसी के रिकार्ड और रजिस्टर पर उनके नाम से ही मरीज को मृत घोषित किया गया है, तो उन्होंने इससे पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया। प्राचार्य डा. संगीता अनेजा से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। |