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मुस्लिम ब्रदरहुड को ट्रंप ने क्यों घोषित किया आतंकी संगठन और क्यों लगा बैन? जानिए किन देशों पर होगा असर

deltin33 5 hour(s) ago views 559
  

इस संगठन का विजन एक अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक कैलिफेट बनाने का है। (जागरण)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका ने मंगलवार को मुस्लिम ब्रदरहुड की मिस्र, लेबनान और जॉर्डन शाखाओं को आतंकवादी संगठन करार दे दिया है। यह फैसला अरब सहयोगियों और अमेरिकी कंजर्वेटिव्स की लंबे समय से चली आ रही मांग का नतीजा है।

1928 में मिस्र में स्थापित यह पैन-इस्लामिक आंदोलन कभी पूरे मुस्लिम दुनिया में फैला हुआ था, लेकिन अब प्रमुख अरब देशों के दबाव में पीछे हट रहा है।

विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बयान में कहा कि यह कदम मुस्लिम ब्रदरहुड की हिंसा और अस्थिरता को रोकने के लिए शुरू की गई लगातार कोशिशों का हिस्सा है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने जोड़ा कि इस संगठन का आतंकवाद फैलाने का पुराना रिकॉर्ड है और अमेरिका इसे वित्तीय सिस्टम से काटने के लिए सख्ती से काम कर रहा है।
इस फैसले के क्या होगा असर?

इस घोषणा से मुस्लिम ब्रदरहुड के अमेरिका में किसी भी एसेट को ब्लॉक कर दिया जाएगा। इसके सदस्यों के साथ कोई लेन-देन अपराध माना जाएगा और उन्हें अमेरिका आने में भारी मुश्किल होगी। मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर फैसले को चुनौती देने की बात कही। उन्होंने कहा कि वे हिंसा के खिलाफ हैं और कभी अमेरिका को धमकी नहीं दी है।

उनके मुताबिक, यह फैसला हकीकत से दूर है और सबूतों पर आधारित नहीं है। यह यूएई और इजरायल जैसे देशों के दबाव में लिया गया है, जो अमेरिकी हितों से ज्यादा अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। मिस्र के साथ-साथ सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे अमेरिकी सहयोगी राजशाही लंबे समय से मुस्लिम ब्रदरहुड को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड का अतीत?

इस संगठन का विजन एक अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक कैलिफेट बनाने का है। मिस्र में यह 2012 में लोकतांत्रिक चुनाव से सत्ता में आया था, जब मोहम्मद मोर्सी राष्ट्रपति चुने गए। यह होस्नी मुबारक के तख्तापलट के बाद हुआ, जिनके शासन में ब्रदरहुड पर बैन था, लेकिन उनकी सोशल सर्विसेज को कुछ छूट मिली हुई थी।

हालांकि, एक साल बाद 2013 में सेना प्रमुख अब्देल फताह अल-सिसी ने तख्तापलट कर मोर्सी को हटा दिया। उसके बाद से सिसी ने ब्रदरहुड पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की।

मिस्र में दबाव के बाद ब्रदरहुड के सदस्यों ने विदेशों में अपना नेटवर्क बनाया, जिसमें बिजनेस, मीडिया और चैरिटी शामिल हैं। तुर्किए इसमें प्रमुख आधार बना, जहां राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की ब्रदरहुड से वैचारिक निकटता है।

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