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भागलपुर के कतरनी चावल-चूड़ा की दुनियाभर में डिमांड, अब उत्पादन बढ़ाने पर फोकस

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भागलपुर की पहचान बन चुका कतरनी चावल और चूड़ा। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर की पहचान बन चुका कतरनी चावल और चूड़ा अब सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपनी खुशबू बिखेर रहा है। मांग इतनी अधिक है कि आपूर्ति कर पाना मुश्किल हो गया है। मांग के अनुरूप उत्पादन नहीं होने से बाजार में कतरनी धान की कमी लगातार महसूस की जा रही है।

हालांकि जिन इलाकों में पहले कतरनी की अच्छी पैदावार होती थी, वहां के कई किसानों ने इससे दूरी बना ली है, लेकिन अब सुल्तानगंज क्षेत्र में कतरनी की खेती तेजी से बढ़ रही है। इसके अलावा कहलगांव, गोराडीह, शाहकुंड और सन्हौला क्षेत्रों में भी किसानों ने कतरनी धान की खेती शुरू की है।

जिला कृषि पदाधिकारी प्रेम शंकर प्रसाद के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कतरनी का रकबा बढ़ा है और आने वाले समय में इसके और विस्तार की संभावना है। किसानों को कतरनी की खेती के लिए प्रति एकड़ छह हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके साथ ही किसानों को जागरूक करने के लिए गोष्ठी और कृषि पाठशालाओं का आयोजन भी किया जाएगा।
700 एकड़ से अधिक में हुई खेती

इस वर्ष जिले में 700 एकड़ से अधिक क्षेत्र में कतरनी धान की खेती हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 200 एकड़ अधिक है। जगदीशपुर क्षेत्र में 200 एकड़ से अधिक, सुल्तानगंज में लगभग 300 एकड़ तथा शाहकुंड, सन्हौला, गोराडीह और कहलगांव क्षेत्रों में भी कतरनी की खेती की गई है।

जर्दालु एंड कतरनी एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के निदेशक मनीष कुमार सिंह ने बताया कि इस समय कतरनी धान 63 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। चूड़ा और चावल की कीमत 150 से 170 रुपये प्रति किलो है। अधिकांश धान थोक व्यापारियों द्वारा खरीदा जा चुका है, जिससे बाजार में उपलब्धता कम हो गई है।
असली कतरनी चावल की ये है पहचान

असली कतरनी चावल की पहचान पानी डालने पर उसकी खुशबू से होती है। पानी में भिगोने के बाद भी यदि सुगंध बनी रहे, तो वह असली कतरनी है। कतरनी का चूड़ा बेहद मुलायम होता है और आसानी से घुल जाता है, जबकि सोनम धान का चूड़ा अपेक्षाकृत सख्त होता है।

मनीष कुमार सिंह के अनुसार एक किलो चूड़ा तैयार करने में करीब 1.7 किलो धान लगता है। एक किलो चूड़ा की लागत लगभग 130 रुपये आती है, इसलिए 150 रुपये प्रति किलो से कम कीमत पर असली कतरनी चूड़ा मिलना मुश्किल है।
मकर संक्रांति को लेकर बढ़ी मांग

मकर संक्रांति के अवसर पर कतरनी चावल और चूड़ा की मांग चरम पर है। लोग इसे सौगात के रूप में अपने सगे-संबंधियों और अधिकारियों को भेज रहे हैं। मुजफ्फरपुर की एक कंपनी ने 200 टन कतरनी चावल की मांग की है, जबकि दिल्ली, बेंगलुरु और पुणे की कंपनियों से भी बड़ी मात्रा में ऑर्डर मिले हैं।

दिल्ली में 220 रुपये और बेंगलुरु में 310 रुपये प्रति किलो की दर से कतरनी चावल की आपूर्ति की गई है। अधिक मांग के कारण फिलहाल आपूर्ति सीमित है और नए-पुराने धान की खरीद का प्रयास किया जा रहा है।
खेती को बढ़ावा देने की तैयारी

कृषि विभाग द्वारा कतरनी धान की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ छह हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। अब तक 362 एकड़ के लिए 21.71 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शेष किसानों को भी जांच के बाद राशि दी जाएगी। इस वर्ष भी प्रोत्साहन योजना जारी रहेगी और रकबा बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
उत्पादन और मार्केटिंग का होगा सर्वे

जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी के निर्देश पर कृषि विभाग कतरनी धान के उत्पादन और मार्केटिंग को लेकर सर्वे कराएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार तक इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। इस कार्य की जिम्मेदारी आत्मा के उप परियोजना निदेशक प्रभात कुमार सिंह को सौंपी गई है। सर्वे रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी।
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