मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर देते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और जानें बचाने के लिए 4ई दृष्टिकोण अपनाने के साथ-साथ इसमें दो और महत्वपूर्ण तत्व जोड़ने का सुझाव दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सभी हितधारक स्पष्ट और संरचित रणनीति के साथ मिलकर काम करें, तो दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
4ई की अवधारणा
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहला ‘ई’ एजुकेशन (शिक्षा) है, जिसका उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच सही जानकारी का प्रसार और जागरूकता पैदा करना है।दूसरा ‘ई’ एनफोर्समेंट (प्रवर्तन) है, जिसमें यातायात नियमों और कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना शामिल है। तीसरा ‘ई’ इंजीनियरिंग है, जो सुरक्षित सड़कों, पुलों और बेहतर यातायात अवसंरचना के निर्माण से संबंधित है। चौथा ‘ई’ इमरजेंसी (आपातकाल) है, जिसके तहत दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित चिकित्सा सहायता और आपात सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
मुख्यमंत्री ने इसमें और दो ‘ई’ जोड़ने का सुझाव दिया है, जो कि एनवायरमेंट (पर्यावरण) और एंगेजमेंट (सहभागिता) है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण का अर्थ सुरक्षित और टिकाऊ सड़क प्रणालियों का विकास है, जबकि सहभागिता नागरिकों, समुदायों और संस्थानों की सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने में सक्रिय भागीदारी पर जोर देती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चार स्वर्णिम नियम हैं शिक्षा, प्रवर्तन, इंजीनियरिंग और आपातकाल। यदि दुर्घटनाओं के मामलों में इन नियमों का पालन किया जाए तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। मैं इसमें दो और शब्द जोड़ना चाहता हूं- पर्यावरण और सहभागिता/विकास। अधिक जागरूकता की आवश्यकता है और इसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए, जिससे अंततः दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि यदि इन छह घटकों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो लगभग 95 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्यवश भारत सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में वैश्विक स्तर पर पहले स्थान पर है, यह एक ऐसा स्थान जिसे देश बनाए रखना नहीं चाहता।उन्होंने इस स्थिति को बदलने और सभी के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। |