फाइल फाेटो।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील लिमिटेड के लिए कानूनी मोर्चे पर सप्ताह की शुरुआत राहत भरी रही। ओडिशा उच्च न्यायालय ने सुकिंदा क्रोमाइट ब्लॉक से जुड़े 4,313 करोड़ रुपये से अधिक के डिमांड नोटिस मामले में कंपनी को मिली अंतरिम सुरक्षा (Interim Protection) की अवधि बढ़ा दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब 19 जनवरी तक ओडिशा का खनन विभाग कंपनी के खिलाफ कोई भी जबरन कार्रवाई नहीं कर सकेगा।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला माइन डेवलपमेंट एंड प्रोडक्शन एग्रीमेंट (MDPA) के तहत खनिज के निर्धारित लक्ष्य (Targets) को पूरा न करने और रॉयल्टी भुगतान से जुड़ा है। खनन विभाग का आरोप है कि टाटा स्टील ने सुकिंदा खदान से खनिज के उठाव में तय सीमा का पालन नहीं किया, जिसे विभाग ने नियमों का उल्लंघन माना है।
दो नोटिस और 4,313 करोड़ की भारी-भरकम मांग
टाटा स्टील पर यह वित्तीय संकट दो अलग-अलग डिमांड नोटिस के जरिए आया है:
- पहला नोटिस (जुलाई 2025): जाजपुर के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ माइंस ने 3 जुलाई को 1,902.72 करोड़ रुपये की मांग की थी। यह खनन समझौते के चौथे वर्ष में लक्ष्य से कम खनिज प्रेषण (Dispatch) के लिए था।
- दूसरा नोटिस (अक्टूबर 2025): विभाग ने 3 अक्टूबर को एक और नोटिस भेजकर 2,410.89 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया। यह मांग समझौते के पांचवें वर्ष (2024-25) के दौरान क्रोम ओर (ChromeOre) के उठाव में आई कमी को लेकर की गई थी।
अदालत में कंपनी का पक्ष टाटा स्टील ने इन दोनों नोटिसों को \“अनुचित\“ बताते हुए उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कंपनी की दलीलों को ध्यान में रखते हुए पुराने स्टे (Stay) को प्रभावी रखा। अगली सुनवाई अब 19 जनवरी को मुकर्रर की गई है, तब तक प्रशासन कोई सख्त कदम नहीं उठा पाएगा। सुकिंदा क्रोमाइट खदान टाटा स्टील की रणनीतिक संपत्तियों में से एक है। यहां से निकलने वाले क्रोमियम का उपयोग स्टेनलेस स्टील और विभिन्न मिश्र धातुओं (Alloys) के निर्माण में किया जाता है। यदि कंपनी को इतनी बड़ी राशि का भुगतान तत्काल करना पड़ता, तो इसका सीधा असर कंपनी की वित्तीय बैलेंस शीट और उत्पादन लागत पर पड़ता। |
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