Shattila Ekadashi 2026 पर तिल का है विशेष महत्व
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi 2026) के दिन भगवान विष्णु की आराधना में \“तिल\“ का विशेष महत्व माना गया है। इस तिथि के लिए शास्त्रों में भी तिल से जुड़े 6 विशिष्ट प्रयोग बताए गए हैं, जिन्हें करने से साधक को श्रीहरि की विशेष कृपा के साथ-साथ अक्षय पुण्य की भी प्राप्ति होती है। षटतिला एकादशी के दिन इन कार्यों को पूरी श्रद्धा के साथ करने से साधक के जीवन की कई समस्याओं का समाधान हो कता है। चलिए जानते हैं इस बारे में।
जरूर करें ये काम
- तिल स्नान :- षटतिला एकादशी के दिन पानी में तिल मिलाकर स्नान करने से शरीर और मन की शुद्धि होती है।
- तिल उबटन :- इस दिन शरीर पर तिल का उबटन भी जरूर लगाएं, जिससे आरोग्य की प्राप्ति होती है।
- तिल हवन :- इस दिन पूजा के दौरान हवन सामग्री में तिल मिलाकर आहुति देने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- तिल तर्पण :- इस दिन पर जल में तिल मिलाकर तर्पण करना चाहिए, जिससे पितरों को शांति मिलती है।
- तिल भोजन :- अपने आहार में भी तिल को जरूर शामिल करें।
- तिल दान :- अपनी क्षमता के अनुसार षटतिला एकादशी पर तिल का दान करें, जिससे स्वर्ण दान के समान फल मिलता है।
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कर सकते हैं ये कार्य
षटतिला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद, जल में तिल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें और उन्हें तिल से बनी चीजों का भोग लगाएं। ऐसा करने से साधक को इस दिन पर व्रत करने का दोनुगा फल प्राप्त होता है।
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तिल दान से मिलता है ये लाभ
षटतिला एकादशी पर तिल का दान करने से न केवल भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। आप चाहें, तो इस दिन पर तिल के लड्डू बनाकर गरीबों व जरूरतमंद लोगों में दान कर सकते हैं। ऐसा करने से साधक को पुण्य फल प्राप्त होते हैं और जीवन का दुख, दरिद्रता और दुर्भाग्य दूर होता है।
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