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32 साल के नेविल हो सकते हैं सर रतन टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में शामिल, पिता नोएल की ग्रुप पर पकड़ होगी मजबूत

Chikheang 2026-1-13 08:27:00 views 431
  

नोएल टाटा के बेटे हो सकते हैं सर रतन टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में शामिल



नई दिल्ली। टाटा ट्रस्ट्स इस हफ्ते के आखिर में एक मीटिंग कर सकता है, जिसमें ग्रुप चेयरमैन नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा को सर रतन टाटा ट्रस्ट (Sir Ratan Tata Trust) के बोर्ड में शामिल किए जाने की अटकले हैं। इस कदम को नोएल टाटा की ट्रस्ट्स पर पकड़ को मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही यह 32 साल के नेविल के उदय का भी संकेत होगा, जिनकी गिनती अब टाटा ग्रुप के सबसे प्रभावशाली लोगों में होती है।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में शामिल

बता दें कि पिछले साल नेविल को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में शामिल किया गया था। इसके अलावा वह ट्रेंट के हाइपरमार्केट बिजनेस स्टार बाजार के हेड और JRD टाटा ट्रस्ट, टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट और RD टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में ट्रस्टी हैं।
चर्चा में रहा था ये ग्रुप

ध्यान देने वाली बात ये है कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी प्रमित झावेरी का कार्यकाल 11 फरवरी को रिन्यू होने वाला है। उन्हें फरवरी 2020 में टाटा ट्रस्ट्स बोर्ड में अपॉइंट किया गया था। मेहली मिस्त्री, डेरियस खंबाटा और जहांगीर एचसी जहांगीर के साथ, झावेरी उस ग्रुप का हिस्सा थे, जिसने पिछले साल सितंबर में विजय सिंह को टाटा संस बोर्ड में फिर से अपॉइंट किए जाने का विरोध किया था।
दोनों ट्रस्ट्स बहुत अहम

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट बहुत अहम हैं। इन दोनों ट्रस्ट्स के पास ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की 51% से ज्यादा हिस्सेदारी है। अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के देहांत हो गया था, जिसके बाद टाटा ट्रस्ट्स एक नियम लाया, जिसके तहत 75 साल से ज्यादा उम्र के नॉमिनी डायरेक्टर्स को हर साल फिर से नियुक्त करना जरूरी बना दिया गया।
बाद में मेहली मिस्त्री के टाटा संस बोर्ड में नॉमिनेट होने का नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने विरोध किया। इसके बाद रतन टाटा के करीबी और पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह के टाटा संस से एग्जिट होने ने सरकार का ध्यान खींचा और सरकार को ग्रुप के मामलों दखल देना पड़ा।
दिख सकते हैं बदलाव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन के तौर पर नोएल टाटा की भूमिका मजबूत हुई है। अब कुछ और ट्रस्टी भी बोर्ड से बाहर निकल सकते हैं। मगर जहांगीर सर रतन टाटा ट्रस्ट में आजीवन ट्रस्टी हैं और पिछले साल ट्रस्टियों के बीच हुए विवाद में उन्हें ज्यादा सक्रिय नहीं देखा गया। वहीं खंबाटा का कार्यकाल इस साल के आखिर में रिन्यूअल के लिए आ सकता है।

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