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निजी गाड़ी को कमर्शियल में बदलना हुआ ‘सुपर ईज़ी’, परिवहन विभाग की नई स्कीम से वाहन मालिकों को बड़ी राहत

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परिवहन विभाग की नई स्कीम से वाहन मालिकों को बड़ी राहत



डिजिटल डेस्क, पटना। राज्य में निजी वाहनों को व्यवसायिक उपयोग में लाने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक आसान हो गई है। परिवहन विभाग ने इस दिशा में नई स्कीम लागू की है, जिससे वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने जानकारी दी कि यदि कोई वाहन मालिक अपनी निजी गाड़ी को कमर्शियल या कमर्शियल गाड़ी को निजी श्रेणी में परिवर्तित कराना चाहता है, तो अब यह प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी।


मंत्री ने बताया कि इसके लिए वाहन मालिक को सबसे पहले फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होगा। इसके साथ ही टैक्स की नई और पुरानी दरों में जो भी अंतर होगा, उसकी राशि जमा करनी होगी।

यदि नई श्रेणी में टैक्स अधिक है तो वाहन मालिक को अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ेगी। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वाहन का उपयोग नए वर्ग में वैध रूप से किया जा सकेगा।
नियमों में किया गया अहम बदलाव

परिवहन मंत्री ने कहा कि अब हल्की और छोटी कमर्शियल गाड़ियों को निजी श्रेणी में बदलने का अधिकार जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) को दे दिया गया है।

पहले यह अधिकार जिला पदाधिकारी (डीएम) के पास था, जिससे प्रक्रिया में देरी होती थी। डीटीओ यह सुनिश्चित करेंगे कि वाहन मालिक की आर्थिक स्थिति मजबूत हो, ताकि वह निजी वाहन का समुचित रखरखाव कर सके। साथ ही, किसी भी कमर्शियल वाहन को कम से कम दो साल तक व्यवसायिक उपयोग में रखना अनिवार्य होगा और परिवर्तन से पहले सभी पुराने टैक्स का भुगतान जरूरी होगा।
सरकारी विभागों में नियमों की सख्ती

परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि कई सरकारी विभाग और निगम नियमों का उल्लंघन करते हुए निजी नंबर की गाड़ियों को किराए पर ले रहे थे।

यह न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे सड़क सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ता है और सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचता है।

इस पर सख्त रुख अपनाते हुए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वाहन किराए पर लेते समय उसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की जांच अनिवार्य रूप से करें।


उन्होंने कहा कि किराए पर ली जाने वाली गाड़ी का कमर्शियल रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, वैध परमिट होना चाहिए और पीली रंग की हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगी होनी चाहिए। भविष्य में निजी गाड़ियों को किसी भी सरकारी अनुबंध में शामिल नहीं किया जाएगा।
उल्लंघन पर कड़ी सजा

मंत्री ने बताया कि हाल ही में छपरा में हुई समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर सख्त निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की जाएगी।

पहली बार नियम तोड़ने पर 5 हजार रुपये तक जुर्माना या तीन महीने की सजा हो सकती है। वहीं दूसरी बार उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना या एक साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।


नई स्कीम से जहां वाहन मालिकों को सुविधा मिलेगी, वहीं अवैध रूप से निजी वाहनों के कमर्शियल इस्तेमाल पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
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