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जागरण संवाददाता, जेवर। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण के लिए प्रथम चरण में जमीन और पुश्तैनी मकान देकर विस्थापित होने वाले किसानों की टाउनशिप को पांच साल बाद यीडा ने पहचान दी है। किसानों का अरोप है कि प्रवेश एवं टाउनशिप में लगे बोर्डों पर गांव के नाम की जगह टाउनशिप में बनाई गई पाकेट को वरीयता दी गई है। जबकि किसान आज भी अपने गांव के नाम को ही अपनी पहचान बनाए रखना चाहते हैं।
कुछ किसानों ने कहा कि कम से कम पांच साल बाद ही सही यमुना प्राधिकरण ने मूलभूत सुविधाएं भले ही पूरी न कराई हो लेकिन टाउनशिप को पहचान दिलाने के लिए टाउनिशप के मुख्य मार्गों से प्रवेश द्वार पर बोर्ड लगाकर पहचान तो दिलाने का काम पूरा कर ही दिया है।
एयरपोर्ट में जमीन देने के बाद जेवर के सात गांव रोही, नगला गणेशी, नगला फूल खां, किशोरपुर (आंशिक), दयानतपुर खेड़ा,नगला शरीफ खां व नगला छीतर के तीन हजार किसानों को विस्थापित किया गया था। जून 2021 में किसानों के लिए टाउनशिप बनाकर किसानों को प्लॉट आवंटित कर दिए। जिसके बाद किसानों ने मकान बनाकर रहना शुरू कर दिया।
यमुना प्रधिकरण ने टाउनिशप में रहने वाले किसानों के लिए सड़क,नाली,पेयजल,पार्क के अलावा बिजली की व्यवस्था सहित मूलभूत सुविधाओं को तैयार कराना था। टाउनिशप के निवासियों का कहना है कि धार्मिक स्थल और कम्यूनिटी सेंटर आजतक तैयार नहीं हुए हैं।
पांच साल से लोग लगातार टाउनशिप में गांव के बोर्ड पर प्रवेश द्वार पर टाउनशिप की पहचान के लिए साइन बोर्ड लगाने की मांग कर रहे थे। सोमवार को प्राधिकरण की तरफ से मुख्य मार्गों से टाउनशिप में प्रवेश के स्थानों पर प्रवेश द्वार लगवा दिए। लोगों का कहना है कि उनकी पहचान जिन गांव से विस्थापित हुए है आज भी वही गांव है लेकिन प्राधिकरण ने प्रवेश द्वार पर लगाए गए बोर्ड पर प्राथमिकता गांव के नाम की जगह पाकेट के नाम को दी है। |
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