सांकेतिक तस्वीर
संवाद सहयोगी, कटिहार। गरीबों की आवाज नक्कारखाने की तूती बनकर रह जाती है। इनकी फरियाद-गुहार व्यवस्था के दायित्व बोध को जागृत नहीं कर पाती, झकझोर नहीं पाती। कुछ ऐसा ही बात समाहरणालय में सोमवार में उस वक्त दिखी जब आजमनगर प्रखंड के पलसा के महादलित पहुंचे थे।
यहां उन्होंने डीएम को आवेदन देकर बताया कि 13 साल पूर्व के नोटिस के बावजूद तीन सौ परिवारों का रास्ता आजतक बंद है। वो दूसरे लोगों के खेतों से होकर अपने घर जाने को विवश हैं। विभागों के कार्यालयों का चक्कर लगा लगाकर थक गए हैं। मामला गांव के मुख्य रास्ता से जुड़ा है।
पीड़ित राजेश रविदास, कुलदीप रविदास, चंदन रविदास, निरंजन रविदास, दिवाकर रविदास, कर्ण रविदास, जीवछ रविदास, प्रकाश रविदास, संजय कुमार रविदास आदि ने बताया कि जोधन रजक द्वारा जबरन सरकारी जमीन का अतिक्रमण कर रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
रास्ता अवरुद्ध होने से आवागाही, बच्चों की पढ़ाई, बीमारों के इलाज और रोजमर्रा के कामों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्ष 2011 में तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा अतिक्रमण हटाने को लेकर नोटिस भी जारी किया गया था। इसमें पुलिस बल द्वारा अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया गया था किंतु 14 साल से नोटिस अमल का रूप नहीं ले पाया हे।
फाइलों में ही कैद है। कहा कि कई बार अंचल कार्यालय, प्रखंड कार्यालय और अन्य विभागीय अधिकारियों को आवेदन दिया गया लेकिन कार्रवाई आश्वासन से आगे नहीं बढ़ी। हर बार जांच और कार्रवाई की बात कही जाती है लेकिन नतीजा शून्य रहा है।
इससे अतिक्रमणकारी का हौसला बुलंद है। वे खुलेआम सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए हुए हैं। बांस बल्ला लगा दिया है। बताया कि रास्ता बंद होने से 37 घर के तीन सौ परिवार हर दिन परेशानी झेलने को विवश हैं। खेतों और कीचड़ भरे इलाकों से गुजरना पड़ता है। |