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जमशेदपुर: नरवापहाड़ यूरेनियम प्रोजेक्ट में विस्थापितों का अनिश्चितकालीन आंदोलन, माइंस गेट जाम, उत्पादन प्रभावित

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संवाद सूत्र, जादूगोड़ा। यूरेनियम कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआइएल) के जादूगोड़ा स्थित नरवापहाड़ यूरेनियम प्रोजेक्ट में विस्थापितों ने सोमवार सुबह छह बजे से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया। विस्थापितों ने प्लांट जाने वाली मुख्य सड़क पर कुर्सियों से बैरिकेडिंग कर माइंस गेट जाम कर दिया। इससे कंपनी में हड़ताल जैसी स्थिति पैदा हो गई है। प्रतिदिन होने वाला यूरेनियम उत्पादन प्रभावित होने लगा है।

आंदोलनकारियों और प्रबंधन के बीच सोमवार रात वार्ता विफल हो गई। पोटका बीडीओ की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में प्रबंधन ने विस्थापितों की मांगों को मानने से मना कर दिया। बैठक के बाद विस्थापित नेता बहादुर किस्कू ने कहा कि फैसला आने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। बैठक में कार्यकारी निर्देशक एमके सिंघई, उपमहाप्रबंधक राकेश कुमार, जादूगोड़ा ग्रुप आफ माइंस के महाप्रबंधक मनोरंजन महाली, डी हांसदा, गिरीश गुप्ता शामिल थे।

आंदोलनकारी वर्ष 2014 और 2023 में हुए समझौतों के अनुसार पीढ़ी दर पीढ़ी नौकरी देने, मृतक कर्मियों के आश्रितों को नियोजित करने, विस्थापित परिवारों को प्रशिक्षण देकर कंपनी में बहाल करने की मांग कर रहे हैं। नेतृत्व कर रहे बहादुर किस्कू ने कहा कि कंपनी के रवैये से लग रहा कि आंदोलन लंबा चलेगा। चेतावनी दी कि इसबार विस्थापित परिवार अपने हक के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।

विस्थापित धनी राम किस्कू ने बताया कि कंपनी वर्ष 2014 से हुए वादों से पीछे हट रही है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की जगह उनके पुत्रों की बहाली और कार्य के दौरान मृतक कर्मियों के आश्रितों की नौकरी का प्रावधान समझौते के अनुसार होना चाहिए था, लेकिन प्रबंधन लगातार टालमटोल कर रहा है। चैतन्य मुर्मू ने कहा कि एक साल में आठ लोगों को नियोजन पर लिखित सहमति मिली थी, जिसे कंपनी पूरा नहीं कर रही है और आउटसोर्सिंग से जगह भर रही है। उन्होंने कहा कि समझौते पर अमल न होने पर नरवापहाड़ यूरेनियम प्रोजेक्ट स्थायी रूप से बंद करने की चेतावनी भी है।

विस्थापित सोमाय हांसदा ने कहा कि केवल यूसीआइएल अध्यक्ष कंचन आनंद राव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ही वह हिस्सा लेंगे। कई बार पूर्व में बैठक की तिथि तय की गई थी, लेकिन प्रबंधन वार्ता से पीछे हट गया। क्षेत्र की पूर्व मुखिया मालती हांसदा ने स्पष्ट किया कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि कंपनी को विस्थापित परिवारों को प्रशिक्षण देकर बहाली करनी होगी, अन्यथा माइंस स्थायी रूप से बंद करने और जमीन लौटाने की चेतावनी दी गई है।

इस आंदोलन को ठेका कर्मियों का भी समर्थन है। विस्थापितों का कहना है कि यह संघर्ष केवल अधिकार पाने के लिए है और उनका संकल्प अडिग है। नारवापहाड़ प्रोजेक्ट के संचालन पर असर और उत्पादन बाधित होने के बावजूद वे हक की लड़ाई जारी रखने के लिए तैयार हैं।

विस्थापितों ने यह भी साफ कर दिया है कि अब वे किसी प्रकार के समझौते के बिना पीछे नहीं हटेंगे। माइंस गेट जाम और अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण कंपनी प्रशासन पर दबाव बढ़ा है। स्थानीय लोग भी आंदोलन के प्रति सहानुभूतिपूर्ण हैं, क्योंकि लंबे समय से हुए वादों का पालन न होना और विस्थापितों के हक की अनदेखी ने नाराजगी बढ़ा दी है।
मंगलवार से ठेका कर्मचारी भी शुरू करेंगे हड़ताल

उधर, झामुमो संयोजक प्रमुख बाघराय मार्डी ने भी सात सूत्री मांगों को लेकर यूसीआइएल की जादूगोड़ा यूनिट में मंगलवार से हड़ताल शुरू करने की घोषण कर दी है। इस हड़ताल में ठेका कर्मचारी शामिल होंगे। ठेका कर्मचारियों की अर्जित छुट्टी की राशि समेत कई मांगें हैं, जिसकी पूर्ति प्रबंधन नहीं कर रहा है।
कंपनी में नो वर्क नो पे नोटिस का होगा विरोध : मदन दास

उधर, यूसीआइएल कर्मचारी मदन दास ने कहा कि आंदोलन के कारण कर्मचारी कार्यालय में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। आंदोलनकारी बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। ऐसे में कंपनी यदि कर्मचारियों के लिए नो वर्क नो पे का नोटिस जारी करती है तो इसका विरोध किया जाएगा।
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