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जम्मू-कश्मीर में सभी मस्जिदों का सर्वे शुरू। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर प्रदेश में पुलिस ने सभी मस्जिदों का सर्वे शुरू किया है। इस सर्वे में मस्जिदों की गणना के साथ संबंधित मस्जिद प्रबंधन समितियों के सदस्यों, मौलवियों और मुअज्जिनों का भी ब्यौरा जुटाया जा रहा है।
सर्वे में मस्जिदों की देखभाल और विकास के लिए खर्च होने वाले धन के स्रोत काे भी दर्ज किया जा रहा है। इसके मस्जिद प्रबंधन समिति के पदाधिकिारयों, इमाम, खतीब और मुअज्जिनों ने कभी विदेश यात्रा की है, या उनका काेई रिश्तेदार विदेश में उसकी जानकारी भी जुटायी जा रही है।
हालांकि, पुलिस ने इस सर्वे के बारे में किसी भी तरह की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है और न संबंधित अधिकारी इस विषय में किसी तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं, लेकिन सूत्रों ने बताया कि बीते कुछ दिनों से जारी यह सर्वे कश्मीर में व्हाइट कॉलर टेरर मॉडयूल के पकड़े जाने की घटना से प्रेरित है।
लाल किले के पास गत नवंबर में हुए आत्मघाति आतंकी हमले में लिप्त व्हाइट कॉलर टेरर मॉडयूल एक मस्जिद से ही सक्रिय था। उसका एक प्रमुख सदस्य मौलवी इरफान अहमद वागे श्रीनगर में एक मस्जिद का इमाम था। व्हाइट कालर टेरर मॉडयूल के पकड़े जाने के कुछ समय बाद पुलिस ने बडगाम और श्रीनगर में कुछ और मौलवियों को भी कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में आरोप पकड़ा है।
बताया कि इस सर्वे में क्षेत्रवार मस्जिदों की संख्या, कौन सी मस्जिद की इमारत इकमंजिला या बहुमंजिला है, मस्जिद की आय और मस्जिद से संबधित खर्चाें का ब्यौरा भी जुटाया जा रहा है। मस्जिदों और मस्जिदों द्वारा संचालित गतिविधियों के लिए चंदा उपलब्ध कराने वाले देशी-विदेशी स्रोैत के साथ यह भी पता किया जा रहा है कि मस्जिद कितनी पुरानी है । मस्जिद बनाने की अनुमति कब और किसने दी यह भी पता किया जा रहा है।
इस सर्वे में सबसे अहम बात यह है कि पहली बार यह चिह्नित किया जा रहा है कि कौन सी मस्जिद जमीयत ए अहले हदीस से जुड़ी है तो कौन सी बरेलवी या देवबंदी विचाराधारा के मुस्लिमों की है। शिया समुदाय की मस्जिदें और इमामबाड़े कहा-कहां हैं, यह भी सर्वे का हिस्सा है।
सूत्रों ने बताया कि प्रत्येक मस्जिद कमेटी के साथ संबधित क्षेत्र में तैनात पुलिसकर्मी संपर्क कर, एक प्रपत्र सौंप रहे हैं, जिसमें उपरोक्त जानकारी के अलावा मस्जिद कमेटी के सदस्यों के नाम,उनकी आयु, उनका स्थायी पता और मोबाइल फोन का माडल व आईएमईआई नंबर और इस्तेमाल किया जा रहा फोन नंबर और इंटरनेट मीडिया पर उनके एकाऊंट की जानकारी दर्ज करने को कहा गया है।
राशनकार्ड का भी इसमें उल्लेख करना है। सर्वे के लिए बांटे जा रहे प्रपत्र में संबधित मस्जिद में तैनात मौलवी, इमाम और मुअज्जिन के बारे में भी विस्तृत जानकारी मांगी गई है। इमाम और मुअज्जिनों ने इस्लामिक शिक्षा कहां से प्राप्त की है, यह भी सर्वे का हिस्सा है।
संबधित सूत्रों ने बताया कि सर्वे के लिए बांटे जा रहे प्रपत्र में मस्जिद कमेटी के सदस्यों, संबधित मौलवी,इमाम,खतीब और मुअज्जिलन को यह भी बताने के लिए कहा गया है कि क्या वह कभी किसी राजनीतिक, अलगाववादी या आपराधिक गतिविधि में लिप्त रहा है या उसके खिलाफ किसी पुलिस स्टेशन में कोई एफआइआर दर्ज है या नहीं |
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