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गांव की गरीबी मिटाने की जिद ने बनाया IAS, वैशाली DM वर्षा सिंह बनीं नारी शक्ति की मिसाल

Chikheang 2 hour(s) ago views 30
  

वैशाली जिले के भगवानपुर प्रखंड के सरकारी स्कूल में बच्चों के साथ मध्याह्न भोजन करतीं डीएम वर्षा सिंह। (जागरण)



रवि शंकर शुक्ला, हाजीपुर। बिहार के खगड़िया जिले के गोगरी के सुदूर गांव बोरना के एक व्यवसायी परिवार की बच्ची को हमेशा इस बात की चिंता रहती थी कि कैसे वह गांव के लोगों की गरीबी और बेबसी को दूर करे।

परिवार की इच्छा के विरुद्ध बच्ची ने आईएएस बनने का दृढ़ संकल्प ले लिया था और अपने पहले ही प्रयास में कामयाबी भी मिल गई। जन्मभूमि का कर्ज उतारने और अपने प्रदेश को सजाने एवं संवारने को लेकर बिहार को ही चुना।

आज ट्रेनिंग के दौरान बिहार के विभिन्न जिलों से होते वैशाली की युवा कलक्टर के रूप में महज छह माह के कार्यकाल में वर्षा सिंह ने ना सिर्फ युवाओं के साथ ही आमजन का दिल जीत लिया है, बल्कि नारी सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल भी बन गई हैं।
अधिक पढ़ने पर गांव के लोग देते थे ताना, इतना पढ़कर कलक्टर बनेगी क्या ?

बिहार के सुदूर गांव की रहने वाली वर्षा के कलक्टर बनने की कहानी काफी दिलचस्प है। बताती हैं कि जब अपने माता-पिता के साथ अपने गांव में जाती थी तो लोग कहते थे कि इतना पढ़कर क्या करोगी ? ताना देते थे कि कलक्टर बनना है क्या?

वर्षा बताती हैं कि गांव में जब लोगों की गरीबी और बेबसी देखती थी तो हमेशा मन में यह बात आती थी कि कैसे मददगार बनूं। व्यवसायी परिवार में पली-बढ़ीं। परिवार में कोई नौकरी में नहीं। सभी कारोबार से ही जुड़े हुए हैं। इस बीच आइएएस बनने के संकल्प के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई को जारी रखा। इतिहास और पब्लिक मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री ली। घर पर रहकर ही तैयारी करते हुए अपने पहले ही प्रयास में आईएएस बनने का सपना पूरा कर लिया।
पिता चाहते थे महाराष्ट्र पर जन्मभूमि का कर्ज उतारने को मैंने बिहार को चुना

वर्षा सिंह बताती हैं कि आईएएस के रूप में जब 2016 में मेरा चयन हो गया तो उनके पिता स्व. अरुण कुमार सिंह चाहते थे कि उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिले। पहली बार अपनी राज को साझा करते हुए वर्षा ने बताया कि मैंने तो अपनी पहली प्राथमिकता ही बिहार दी थी। उन्हें बिहार कैडर मिल भी गया। मैंने यह बात अपने पिता को नहीं बताई थी।

बिहार कैडर मिलने पर उन्हें मन ही मन इस बात की काफी खुशी हुई कि अब उन्हें अपनी मातृ भूमि का कर्ज उतारने का अवसर मिलेगा। साथ ही साथ गांव में लोगों की जिस गरीबी और बेबसी को उन्होंने करीब से देखा था, उसे दूर करने का मौका भी मिलेगा।
छह माह के ही कार्यकाल में अपनी कार्यशैली से लोगों के मानस पटल पर छोड़ी अमिट छाप

वर्षा सिंह ने अपने काम की बदौलत नारी सशक्तिकरण की मिसाल बन गई हैं। वैशाली के डीएम के रूप में अपने छह माह के ही कार्यकाल में सेवा की ऐसी मिसाल पेश की है कि हर कोई इस आईएएस बिटिया की चर्चा करते नहीं थक रहा है।

वैशाली के डीएम के रूप में कार्यभार संभालते ही वर्षा ट्रैक्टर पर सवार होकर वैशाली के सुदूर ग्रामीण इलाके बहलोलपुर दियारा में पहुंच गईं। दियारा के इस इलाके में पहुंचने वाली वर्षा जिले की पहली डीएम थीं। वहीं. अपनी पहली ही पदस्थापन के दौरान लोकसभा का चुनाव कराया।

चुनाव में मतदाताओं को जागरूक करने के लिए वर्षा ने खुद गीत गाए। एक-दो नहीं बल्कि कई सार्वजनिक स्थानों पर गीत गाकर मतदाताओं को जागरूक करने का काम किया। परिणाम यह रहा कि जिले में रिकार्ड मतदान हुआ। वहीं, जान को जोखिम में डालकर वर्षा ने नाव से करीब 50 किलोमीटर की दूरी तय कर राघोपुर दियारा में आई भीषण बाढ़ में खुद मोर्चा संभाल लिया और बाढ़ पीड़ितों की मदद की।

अभी हाल ही में जिले के भगवानपुर प्रखंड के एक स्कूल में पहुंचकर बच्चों के साथ पंगत में बैठकर मध्याह्न भोजन किया। अपने काम की बदौलत डीएम ने ऐसी मिसाल पेश की है कि वैशाली में बच्चा से बूढ़ा तक उनका कायल हो गया है।
कोरोना संक्रमण के दौरान पिता का हो गया था निधन

वर्षा सिंह का पूरा परिवार महाराष्ट्र के नागपुर में ही रहता है। कोरोना के दूसरे फेज के संक्रमण के दौरान पिता अरुण सिंह का निधन हो गया। इस हादसे ने वर्षा को काफी व्यथित किया। मां नूतन सिंह कभी साथ में तो कभी परिवार के साथ नागपुर रहती हैं।

पति भी कारोबार से ही जुड़े हुए हैं। एक चार साल का बेटा है। सुबह से लेकर शाम तक कभी-कभार देर रात तक ड्यूटी के बीच जब आवास पर पहुंचती हैं तो बेटा मां से लिपट जाता है। वर्षा कहती हैं कि एक ओर कर्तव्य तो दूसरी ओर घर-परिवार। दोनों के बीच सामंजस्य बैठाना पड़ता है।
गांव में लोगों के साथ जमीन पर बैठक करना वर्षा को है काफी पसंद

कलक्टर का ठाठ-बाट से इतर वर्षा सिंह को गांव में लोगों के साथ जमीन पर बैठकर संवाद करना काफी पसंद है। बात चाहे गांवों में जनता दरबार की हाे या अन्य बैठकों की, वर्षा जब गांव में पहुंचती हैं तो ज्यादातर जमीन पर बैठकर ही लोगों के साथ संवाद करती हैं।

अभी चुनाव के दौरान भी मतदाता जागरूकता को लेकर गांवों में पहुंची तो जमीन पर बैठकर ही लोगों के साथ संवाद किया। महिलाओं के बीच जमीन पर बैठ अपनी कलाई पर मेंहदी भी रचवाई। इसका खासा प्रभाव भी लोगों पर पड़ता है। कहती हैं कि मैं खुद को डीएम नहीं जनता का सेवक मानती हूं। अगर मेरी जनता जमीन पर बैठती है तो मुझे भी उनके साथ बैठना अच्छा लगता है।
वैशाली में कम समय में कई उपलब्धियां डीएम वर्षा सिंह के नाम

काम की बदौलत डीएम वर्षा सिंह ने कई उपलब्धियां अपने नाम की है। पटना के कच्ची दरगाह से वैशाली के बिदुपुर के बीच करीब 5000 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन सिक्सलेन पुल का राघोपुर तक संपर्क का उद्घाटन अभी छह माह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया।

वहीं, 540 करोड़ रुपये की लागत से ऐतिहासिक वैशाली में बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्तूप का उद्घाटन भी हाल ही में मुख्यमंत्री ने किया। जंदाहा में 1300 करोड़ रुपये की लागत से औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना का काम चल रहा है। पर्यटन के साथ उद्योग को बढ़ावा देकर जिले की तरक्की के साथ हर हाथ को रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिश है।

वहीं, बरैला में 81 करोड़ रुपये की लागत से झील के सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। जिले के विकास को हजारों करोड़ रुपये की लागत से अन्य योजनाएं डीएम वर्षा सिंह के कुशल निर्देशन में संचालित हैं। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के साथ सुगम यातायात की कोशिशों में जुटे होने की बात डीएम ने कही।

यह भी पढ़ें- डीएम की पहल से बिहार में मूक-बधिर बच्चों को मिली नई आवाज, \“श्रवण श्रुति\“ कार्यक्रम बना वरदान
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