बाप-दादा के नाम पर जमाबंदी, डिजिटल पहचान बनाने में परेशानी
संवाद सहयोगी, पताही। पुस्तैनी जमीन पर किसानों के लिए एकीकृत डिजिटल पहचान पत्र बनवाने की राह मुश्किल है। विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया किसान रजिस्ट्रेशन कार्य कुछ किसानों के लिए राहत की बात है तो कई के लिए नई उलझन लेकर आ रहा।
फार्मर आईडी यानी डिजिटल पहचान के लिए पंचायतों में लगातार आयोजित हो रहे किसान पंजीकरण शिविरों में भारी भीड़ उमड़ रही, लेकिन तकनीकी और दस्तावेजी बाधाओं के कारण अधिकांश किसानों मायूसी हाथ लग रही।
किसानों की परेशानी की सबसे बड़ी वजह उनकी जमीन की पुरानी जमाबंदी है, जो आज भी उनके पुरखों के नाम से दर्ज है। बड़ी संख्या में पुस्तैनी जमीन पर वर्षों से खेती-बाड़ी कर रहे किसानों ने अबतक अपने जमीन की जमाबंदी अपने नाम स्थानांतरित नहीं कराई है।
फार्मर आईडी के लिए कृषि विभाग के स्पष्ट निर्देश के अनुसार फार्मर रजिस्ट्रेशन उसी व्यक्ति का किया जा सकता है, जिसके नाम पर जमीन की जमाबंदी हो। यहीं शर्त पुरानी जमाबंदी वाले किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। कारण यह कि उनके पिता या दादा का निधन हो चुका है।
उत्तराधिकार की प्रक्रिया अबतक पूरी नहीं की जा सकी है। ऐसे किसानों को समाधान के नाम पर केवल जमाबंदी बंटवारा और नामांतरण कराने की प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी जा रही।
किसानों का कहना है कि जमाबंदी बंटवारा एक जटिल और वर्षों तक चलने वाली प्रक्रिया है। इसके लिए सभी हिस्सेदारों की सहमति जरूरी है। पताही के किसान चुमन सिंह, मिंटू कुमार, पिंटू कुमार, दीपक कुमार, मुन्ना कुमार, राहुल सिंह, विनोद राम और लालू पासवान ने बताया कि इस प्रक्रिया के कारण उन्हें डर है कि कहीं वो समय रहते सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाएं।
किसानों का आरोप है कि सरकार योजनाएं तो लाती है, लेकिन जमीनी हकीकत को नजर अंदाज कर उन्हीं योजनाओं से किसानों को बाहर भी कर देती है। प्रखंड में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के 12 हजार 500 लाभार्थी हैं, लेकिन अबतक महज 600 किसानों की ही फार्मर आईडी बन सकी है।
क्या कहते हैं पदाधिकारी?
जमाबंदी को दूसरी और तीसरी पीढ़ी के वंशजों के नाम से स्थानांतरित करने के लिए सभी हिस्सेदारों की सहमति अनिवार्य है। इस दिशा में किसानों को तत्काल प्रयास कर जमाबंदी हस्तानांतरित करा लेनी चाहिए। - नाजनी अकरम, सीओ, पताही
किसान रजिस्ट्रेशन सरकार की महत्वपूर्ण पहल है, ताकि सभी किसानों को एकीकृत डिजिटल पहचान प्रदान की जा सके और योजनाओं का लाभ सीधे दिया जा सके। फार्मर रजिस्ट्रेशन के लिए जमीन की जमाबंदी आवश्यक है, क्योंकि इसी आधार पर वास्तविक किसान की पहचान सुनिश्चित की जाती है। जिन किसानों की जमाबंदी उनके नाम पर नहीं है, उन्हें पहले नामांतरण और बंटवारे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।- सुमित कुमार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, पताही |