अमेरिका ने फिर दी क्यूबा को धमकी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका की टेढ़ी नजर एक बार फिर क्यूबा पर है। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर कहा है कि इस आइलैंड को वॉशिंगटन के साथ डील करनी चाहिए, नहीं तो उसे गंभीर आर्थिक नतीजे भुगतने होंगे। रविवार को ट्रंप ने चेतावनी दी कि क्यूबा को अब वेनेजुएला से तेल या पैसा नहीं मिलेगा।
उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, “क्यूबा को अब और तेल या पैसा नहीं मिलेगा - जीरो! मैं उन्हें जोरदार सलाह देता हूं कि वे बहुत देर होने से पहले कोई डील कर लें।“ ट्रंप ने तर्क दिया कि वेनेज़ुएला के समर्थन के बिना, क्यूबा की सरकार गिरने की कगार पर थी।
ट्रंप और रुबियो ने दिए ये संकेत
उन्होंने पहले कहा था, “मुझे नहीं लगता कि हमें कोई कार्रवाई करने की जरूरत है।“ यह भी कहा कि निकोलस मादुरो और वेनेज़ुएला की तेल सप्लाई के बिना, क्यूबा ऐसा लग रहा है जैसे गिरने वाला है। विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक कदम और आगे बढ़कर कहा कि वॉशिंगटन शायद चुपचाप नहीं बैठेगा।
रुबियो ने कहा, “मैं आपको यह नहीं बताने वाला कि हमारे अगले कदम क्या होंगे। अगर मैं हवाना में रहता और सरकार में होता तो मुझे चिंता होती।“ इसके बाद ट्रंप ने एक पोस्ट को रीपोस्ट किया जिसमें सुझाव दिया गया था कि रूबियो एक दिन क्यूबा के नेता बन सकते हैं। इस पर उन्होंने लिखा, “यह मुझे अच्छा लग रहा है!“
वेनेजुएला ऑपरेशन ने समीकरण क्यों बदल दिए?
क्यूबा पर नए सिरे से ध्यान देना उस अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन के बाद शुरू हुआ, जिसके कारण वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ा गया था। इस बार वॉशिंगटन ने हवाना पर वहीं चोट की, जहां उसे सबसे ज्यादा दर्द होता है।
सालों से क्यूबा अपनी इकॉनमी चलाने के लिए वेनेजुएला के तेल पर निर्भर रहा है, जिसके बदले में वह सुरक्षा और मेडिकल स्टाफ देता रहा है। मादुरो को हटाए जाने और ट्रंप द्वारा वेनेज़ुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज पर तेल की सप्लाई अमेरिका की ओर मोड़ने का दबाव डालने के बाद अब क्यूबा एक गंभीर एनर्जी संकट का सामना कर रहा है।
रुबियो इसे पर्सनली क्यों ले रहे?
मार्को रूबियो के लिए क्यूबा की सरकार के गिरने का विचार बहुत ज्यादा मायने रखता है। उनके माता-पिता ने फिदेल कास्त्रो की 1959 की क्रांति से तीन साल पहले क्यूबा छोड़ दिया था। फ्लोरिडा की राजनीति में अपने शुरुआती दिनों में रूबियो ने कास्त्रो के विरोधी के तौर पर अपनी पहचान बनाई, जिन्हें उन्होंने एक बुरा, हत्यारा तानाशाह बताया था। क्यूबा की सरकार को गिरते हुए देखना उनके जीवन भर के राजनीतिक मिशन के पूरा होने जैसा होगा।
अमेरिका ने पहली बार नहीं की क्यूबा को कमजोर करने की कोशिश
यह पहली बार नहीं है जब वॉशिंगटन ने क्यूबा के सहयोगियों को निशाना बनाकर उसे कमजोर करने की कोशिश की है। 2019 में ट्रंप और रूबियो ने वेनेजुएला में मादुरो को सत्ता से हटाने की कोशिश का समर्थन किया था। वह कोशिश उसी साल अप्रैल में नाकाम हो गई थी।
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन आर बोल्टन के एक संस्मरण के अनुसार, क्यूबा की खुफिया एजेंसी ने मादुरो को इस साजिश के बारे में चेतावनी दी थी। वेनेजुएला में मौजूद क्यूबा के एजेंट्स ने उन्हें इस कोशिश को नाकाम करने में मदद की और बताया जाता है कि जरूरत पड़ने पर मादुरो को हवाना ले जाने के लिए एक विमान तैयार था।
सोवियत संघ के टूटने के बाद से क्यूबा ने दशकों तक अकेलापन झेला है। उसे रूस और चीन से सपोर्ट मिलता रहता है और अब वह वेनेजुएला पर उतना निर्भर नहीं है जितना एक दशक पहले था।
सत्ता परिवर्तन की नाकाम कोशिशों का लंबा इतिहास
क्यूबा के नेतृत्व को हटाने की अमेरिकी कोशिशें ट्रंप से शुरू नहीं हुई थीं। क्यूबा की इंटेलिजेंस और डीक्लासिफाइड अमेरिकी डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो को हटाने की सैकड़ों कोशिशें की गईं, जिनमें बड़े पैमाने पर हमले से लेकर गुप्त हत्या की साजिशें तक शामिल थीं।
1961- बे ऑफ पिग्स के बाद राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने सरकार को अस्थिर करने के लिए आर्थिक तोड़फोड़, मनोवैज्ञानिक युद्ध और गुप्त कार्रवाई के एक सीक्रेट अभियान को मंजूरी दी।
डीक्लासिफाई किए गए रिकॉर्ड से पता चलता है कि क्यूबा में सीआईए की साजिश कुछ योजनाएं बेहद ही अजीब थीं। मसलन-
विस्फोटक सिगार: एक ऐसा सिगार जिसमें बम लगा था और जिसे फटने के लिए बनाया गया था।
जहरीला मिल्कशेक: हवाना लिब्रे होटल में कास्त्रो के ड्रिंक में जहर की गोली मिलानी थी।
जहरीला डाइविंग सूट: एक वेटसूट जिसमें टीबी के बैक्टीरिया लगे थे और एक दूषित ब्रीदिंग डिवाइस।
विस्फोटक सीप: कास्त्रो को डाइविंग करना पसंद था वहां के लिए एक चमकीले रंग का शेल को तैयार किया गया था, जिसमें बम लगाया गया था।
पूर्व प्रेमिका की साजिश: एक पूर्व प्रेमिका से उन्हें जहर देने के लिए कहा गया।
चरित्र हनन: उन्हें बेइज्जत करने की कोशिशें।
इनमें से कई योजनाएं इसलिए भी आगे नहीं बढ़ पाईं, क्योंकि उन्हें अव्यावहारिक या बहुत ज्यादा जोखिम भरी मानकर खारिज कर दिया गया। 1962 से अमेरिका ने आर्थिक दबाव बनाने के लिए क्यूबा पर ट्रेड बैन लगा रखा है।
कास्त्रो को कितनी बार निशाना बनाया गया?
1975 की चर्च कमेटी ने 1960 और 1965 के बीच कास्त्रो की हत्या की सीआईए की आठ साजिशों की पुष्टि की थी। वहीं, क्यूबा की काउंटर-इंटेलिजेंस के पूर्व प्रमुख फेबियन एस्केलेंटे ने 638 कोशिशों का दावा किया और कहा कि अकेले निक्सन के जमाने में ही 184 कोशिशें हुई थीं।
दशकों के दबाव, प्रतिबंधों, खुफिया कार्रवाई और डिप्लोमैटिक आइसोलेशन के बावजूद क्यूबा की सरकार टिकी हुई है। आज, भले ही अमेरिका को मादुरो के पतन के बाद एक मौका दिख रहा है, लेकिन यह भी माना जा रहा है कि असली बदलाव के लिए लगातार राजनीतिक, आर्थिक और शायद मिलिट्री दखल की जरूरत होगी। जैसा कि रुबियो ने भी कहा, “ऐसी चीजों में समय लगता है।“
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