रैपटर्स टीम के सदस्य जटायु और संपति को प्रदर्शित करते हुए। जागरण
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। आपातकाल स्थिति में लोगों को दवाएं पहुंचाना उनकी हर स्थिति पर नजर रखना पहले काफी आसान महाराष्ट्र की डॉ. डीवाइ पाटिल यूनिवर्सिटी की टीम ने डिजास्टर मैनेजमेंट की टीम रैपटर्स ने कर दिखाया है। टीम के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने जटायु और संपति के नाम से दो ड्रोन तैयार किए हैं। इन्हें गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय निडर कार्यक्रम में प्रदर्शित किया है।
रैपटर्स टीम का नेतृत्व कर रहे यश भोसले ने बताया कि उनकी टीम ने प्राब्लम स्टेटमेंट के जरिए दो ड्रोन तैयार किए हैं। इनको जटायु और संपत्ति नाम दिया गया है। दोनों ड्रोन आपातकालीन स्थिति में फंसे लोगों को राहत सामग्री मुहैया कराएंगे।
यह दोनों ड्रोन इमेज अपने लेंस में फीड करके फंसे हुए व्यक्तियों को अलार्म के माध्य से संकेत देंगे और सामग्री पहुंचाएंगे। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के अलावा अन्य पहाड़ी इलाकों में लैंड स्लाइड की अक्सर घटनाएं होती रहती हैं।
इस दौरान आपातकालीन स्थिति में फंसे लोगों को आवश्यक मदद पहुंचाने के लिए दस सदस्य टीम ने ड्रोन तैयार किया है और राष्ट्रीय स्तरीय फाइनल कार्यक्रम में पेश किया है। डिजास्टर मैनेजमेंट के तहत दस किलो तक वजन उठाने वाला ड्रोन तैयार किया है। इसका नाम जटायु रखा है, जबकि, कम वजन का सामान पहुंचाने के लिए संपत्ति नाम के ड्रोन को तैयार किया गया है।
सेंसर स्कैन कर लोगों के पास पहुंचाएंगे सामग्री
टीम के सदस्यों ने बताया कि जटायु करीब दस किलो तक वजन उठाकर एक जगह से दूसरी जगह जा सकता है। संपति ड्रोन दो किलो तक वजन उठा सकता है। इन ड्रोन में एक प्लास्टिक बोर्ड लगा रखा है। इसमें सामान को रखकर आसानी से पहुंचाया जा सकेगा।
ड्रोन में अलार्म वाला एक सेंसर लगा है, जोकि आपात स्थिति में फंसे हुए व्यक्तियों को सचेत करेगा। ड्रोन में सेंसर के माध्यम से फंसे हुए लोगोंं की जानकारी देगा। इससे उन्हें सामान सटीक जगह पर गिरा सकेगा।
हर स्थिति पर नजर रखेंगे ड्रोन
टीम में कप्तान यश भोसले, फैकल्टी डॉ., अरुण लिंमगावकर, उत्कर्ष सिंह आनंद कत्राल, रुकेश पंवार, अरविंद राव, विजय मगदुम, अथर्व कुराणे और आयुष वाघमारे शामिल हैं। इस टीम ने आपातकाल स्थिति में फंसे लोगों के आवश्यक सामग्री पहुंचाने में होने वाली समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ड्रोन को तैयार किया है। इन ड्रोन की मदद से आसानी से सामग्री पहुंचाई जा सकेगी और उनकी स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी। |
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