प्रतीकात्मक तस्वीर।
बलवान शर्मा, नारनौल। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने आरटीए विभाग में एनओसी के नाम से नया घोटाला उजागर किया है। इस मामले में अकेले महेंद्रगढ़ जिले में 73 लाख 56 हजार 512 रुपये की सरकार को चपत लगा दी गई। पूरे प्रदेश में करीब पांच सौ करोड़ रुपये का घोटाला होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस मामले में सीएम फ्लाइंग की शिकायत पर शहर पुलिस ने आरटीए विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों व गाड़ी चालकों सहित 14 के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जाहिर है कि ऐसे में आरटीए में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं।
4970 वाहनों की एक सूची आरटीए को दी
इस संबंध में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के सहायक उप निरीक्षक सचिन ने थाना शहर नारनौल में एफआइआर दर्ज करवाई है। उन्होंने बताया कि आरटीए कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा दलालों के माध्यम से वर्ष 2017 से पहले के व्यवसायिक वाहनों को बिना माल व यात्री कर जमा किये ही एनओसी जारी की गई। सीएम फ्लाइंग की जांच के दौरान आबकारी एवं कराधान विभाग द्वारा 31 मार्च 2017 से पहले के माल व यात्री कर बकाया 4970 वाहनों की एक सूची आरटीए को दी गई थी।
इनमें से आरटीए विभाग द्वारा 814 वाहनों की एनओसी जारी की जानी पाई गई। वहीं, आबकारी एंव कराधान विभाग के रिकाॅर्ड के अनुसार केवल 366 वाहन मालिकों द्वारा ही बकाया माल एंव यात्री कर अब तक विभाग में जमा होना पाया गया। बकाया 448 व्यवसायिक वाहनों का माल व यात्री कर जमा होना नहीं पाया गया।
17 एनओसी फाइलों की जांच की गई
इस पर इन 448 वाहनों मे से रेंडमली 17 एनओसी फाइलों की जांच की गई। इनमें से केवल चार फाइलों में ही आबकारी एवं कराधान विभाग द्वारा जारी पीपीटी-5 सर्टिफिकेट पाई गई। अवलोकन के लिए ली गई इन 17 फाइलों का मिलान आबकारी एंव कराधान विभाग के रिकाॅर्ड से किया गया तो इस विभाग ने अपने कार्यालय के रिकाॅर्ड के अनुसार बताया कि इन सभी 17 व्यवसायिक वाहनों पर माल व यात्री कर बकाया है। इन 17 में से चार व्यावसायिक वाहनों की एनओसी फाइल में फर्जी पीपीटी-5 सर्टिफिकेट (सर्टिफिकेट पेमेंट आफ टैक्स) लगा हुआ था।
आरोपित अब तक गिरफ्तारी से दूर
जांच के दौरान 448 वाहनों का कुल 73,56,512 रुपये का कर विभाग में जमा नहीं होना पाया गया। इस संबंध में थाना शहर में आरटीए विभाग के परिहवन निरीक्षक राजेश कुमार, बीर सिंह, नवीन लिपिक, अभिनव लिपिक, अंकित लिपिक, राहुल लिपिक, संत कुमार उप परिवहन निरीक्षक, राजेश कुमार परिवहन निरीक्षक, लोकेश लिपिक, जितेन्द्र तलवार परिवहन निरीक्षक, महाबीर परिवहन निरीक्षक व गाड़ी मालिकों तथा अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। आरोपित अभी गिरफ्तार नहीं हुए हैं। पुलिस इस मामले में तथ्यों की जांच करेगी तो करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये का घोटाला उजागर होने की संभावना है।
सूत्रों का कहना है कि इस मामले की प्रदेश के अन्य जिलों में फरीदाबाद, गुरुग्राम व सोनीपत में सबसे बड़ा घोटाला है। इन जिलों में एक लाख व्यवसायिक वाहनों की एनओसी दे दी गई। अकेले गुरुग्राम में 200 करोड़ का घोटाला हुआ है। इसी तरह करीब इतना ही बड़ा घोटाला हुआ है।
घोटाले को कैसे दिया गया अंजाम?
आरटीए विभाग के अधिकारी, दलाल और गाड़ी मालिकों की मिलीभगत से हुआ है बड़ा घोटाला
असल में 2017 तक प्रदेश में व्यवसायिक वाहनों माल एवं यात्री किराया कर का भुगतान आबकारी एवं कराधान विभाग को किया जाता था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने पैसेंजर एवं गुड्स टैक्स के भुगतान का कार्य ऑनलाइन कर परिवहन विभाग को दे दिया। पूरे हरियाणा में 2017 से पहले गाड़ियों का पैसेंजर एवं गुड्स टैक्स करोड़ों बकाया था।
“सरकार ने निर्णय लिया था कि 31 मार्च 2017 से पहले का बकाया टैक्स की वसूली जब वाहन मालिक एनओसी लेगा तो क्षेत्रीय परिवहन विभाग आवेदक से आबकारी एवं कराधान विभाग से पीपीटी-5(सर्टिफिकेट पेमेंट ऑफ टैक्स) फाइल के साथ लगवाए बगैर एनओसी जारी नहीं की जाएगी लेकिन क्षेत्रीय अधिकारियों ने फर्जी एनओसी जारी कर इस घोटाले को अंजाम दे दिया।हमने 17 फाइलों की रैंडमली जांच की तो पाया कि 13 फाइलों में एनओसी ही नहीं थी। शेष चार में लगी एनओसी को आबकारी एवं कराधान विभाग से जांच करवाई गई तो उन्होंने उनके विभाग से एनओसी जारी होने की बात से मना कर दिया। जाहिर है कि ये फर्जी एनओसी के जरिये घोटाला किया गया है। इसके आधार पर हमने पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज करवाई है।“
-सचिन, सहायक उप निरीक्षक, सीएम फ्लाइंग
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