Pradosh Vrat 2026: किन चीजों से करें शिवलिंग का अभिषेक? (AI Generated Image)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन महादेव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विशेष चीजों के द्वारा शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिवलिंग का अभिषेक करने से महादेव प्रसन्न होते हैं। साथ ही जीवन में आ रहे संकट दूर होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि प्रदोष व्रत के दिन किन चीजों से शिवलिंग (Shivling par kya chadhana chahiye) का अभिषेक करना चाहिए।
शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें
- प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर धतूरा और भांग अर्पित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महादेव को धतूरा और भांग अर्पित करने से शिव जी प्रसन होते हैं और बिगड़े काम पूरे होते हैं।
- इसके अलावा शिवलिंग का दूध और गंगाजल से अभिषेक करने से मन को शांति मिलती है और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
- आर्थिक तंगी से छुटकारा पाने के लिए शिवलिंग पर अक्षत अर्पित करने चाहिए। इस दौरान महादेव के मंत्रों का जप करें। इससे महादेव की कृपा से धन लाभ के योग बनते हैं और सभी मुरादें पूरी होती है।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर चंदन लगाने से साधक को समाज में मान-सम्मान मिलता है और शिव जी की कृपा बनी रहती है।
- अगर आप शनि दोष का सामना कर रहे हैं, तो ऐसे में शिवलिंग पर शमी के पत्ते अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि शमी के पत्ते शिवलिंग पर चढ़ाने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है।
प्रदोष व्रत 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, 16 जनवरी को प्रदोष व्रत किया जाएगा।
माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत- 15 जनवरी को शाम 08 बजकर 16 मिनट पर
माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का समापन- 16 जनवरी को देर रात 10 बजकर 21 मिनट पर
शिव मंत्र (Shiv Mantra)
1. सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालं ओम्कारम् अमलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।।
2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
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