प्रतीकात्मक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। साइबर ठगों ने राजधानी दिल्ली में ठगी की सबसे बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। अज्ञात आरोपितों ने एक ग्रेटर कैलाश-दो में रहने वाली 77 वर्षीय एनआरआइ महिला के खाते से 14.80 करोड़ रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। फर्जी ट्राई और आईपीएस अधिकारी बने ठगों ने पीड़िता को 24 दिसंबर से दस जनवरी तक कुल 18 दिन डिजिटल अरेस्ट किए रखा।
इस दौरान आठ किश्तों में बुजुर्ग महिला के खाते से 14.80 करोड़ रुपये अलग अलग खातों में जमा करवा लिए।दस जनवरी की सुबह जब महिला व उनके पति को ठगी का एहसास हुआ, तब उन्होंने इसकी सूचना 1930 पर दी। सीआर पार्क थाना पुलिस ने इस मामले में एफआइआर दर्ज की है।
शिकायतकर्ता महिला इंद्रा तनेजा और उनके पति ओम तनेजा दोनों अमेरिकी सरकार में कार्यरत थे।ये दोनों वर्ष 2015-2016 के दौरान सेवानिवृत्त होकर भारत आ गए थे। यहां ग्रेटर कैलाश-दो में रह रहे थे। इंद्रा तनेजा ने दी शिकायत में बताया कि उनके पास 24 दिसंबर 2025 को एक फोन कॉल आया।
कॉल करने वाले ने खुद को दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राइ) का अधिकारी बताया। उसने महिला को डराते हुए कहा कि उनका मोबाइल नंबर आपत्तिजनक और अभद्र कॉल में इस्तेमाल किया गया है। फोन करने वाले ने कहा कि उनके बैंक खातों में जो पैसा पड़ा है, वह कॉल धन है। उनके खातों की निगरानी से पता चला है कि उनकी गतिविधियां मनी लान्ड्रिंग जैसी गतिविधियों में संलिप्त हैं।
फोन करने वाले व्यक्ति ने उनके फोन को कथित तौर पर मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन से जोड़ा गया, जहां एक अधिकारी ने स्वयं को आइपीएस गिरफ्तारी बताया और धमकी दी कि सभी बैंक खातों के वेरिफिकेशन कराएं। अन्यथा टीम को फिजिकल गिरफ्तारी के लिए रवाना किया जाएगा।
ऐसा कहकर उन्होंने बताए गए खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा। इस तरह पीड़ित बुजुर्ग दंपत्ति को 24 दिसंबर से दस जनवरी तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा गया। अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए आठ बार में करीब 14.85 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।
इस मामले की जांच सीआर पार्क थाने के अलावा इफसो की टीम भी कर रही है। इफसो के निदेशक ने इस अपराध को बड़ा और गंभीर मानते हुए विशेषज्ञों को जांच में शामिल किया है।
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