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उत्तराखंड में चार साल के अंदर गुलदार बढ़े या घटे, अब साफ होगी तस्वीर

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तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण



केदार दत्त, देहरादून। मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती के बीच गुलदार के बढ़ते हमलों ने चिंता अधिक बढ़ा दी है। इसे देखते हुए राज्य में गुलदारों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इस परिदृश्य में विभाग ने अब भारतीय वन्यजीव संस्थान से गुलदारों की गणना कराने का निश्चय किया है।

पिछली गणना वर्ष 2022 में हुई थी, तब यहां गुलदारों की संख्या 3115 आंकी गई थी। बीते चार वर्ष में इनकी संख्या बढ़ी या घटी, इसे लेकर अब तस्वीर साफ होगी। खास बात यह कि इस वर्ष की गणना केवल संख्या निर्धारण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें गुलदार के व्यवहार में बदलाव, आबादी क्षेत्रों में उसकी धमक जैसे बिंदुओं का विश्लेषण भी होगा।

राज्य में जब भी वन्यजीवों के हमले की बात होती है तो चर्चा के केंद्र में गुलदार ही सबसे अधिक रहता है। कारण है, इसके हमलों की निरंतर बढ़ती घटनाएं। ऐसे में ग्रामीणों के बीच से ही यह बात उठती आ रही है कि गुलदारों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हो गई है। हालांकि, वर्ष 2008 के बाद गणना न होने के कारण इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं था।

लंबे इंतजार के बाद वर्ष 2022 में जैसे-तैसे वन विभाग ने गणना कराई। इसके तहत 1000 से 3500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई गणना में गुलदारों की संख्या 2276 आंकी गई। इसके अलावा वर्ष 2018 में हुई बाघ गणना के दौरान 791 से 1000 मीटर तक के क्षेत्र में 839 गुलदार होने का आकलन किय गया था। इन दोनों आंकड़ों को मिलाकर गुलदारों की संख्या 3115 आंकी गई। चार अगस्त 2023 को हुई राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में यह आंकड़े जारी किए गए थे।

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550 व्यक्तियों की मौत और 2138 घायल

उत्तराखंड में वर्ष 2000 से 2025 तक गुलदारों के हमलों में 550 व्यक्तियों की मृत्यु हुई, जबकि 2138 घायल हुए हैं। इसके चलते वन सीमा से सटे गांवों व शहरों में दहशत होना स्वाभाविक है। जिस हिसाब से गुलदारों के हमले बढ़ रहे हैं और इनके व्यवहार में आक्रामकता दिख रही है, उसने चिंता और चुनौती दोनों बढ़ा दी है। इसे देखते हुए विभाग ने अब गुलदारों की गणना कराने का निश्चय किया है। साथ ही इसके व्यवहार में आए बदलाव समेत अन्य बिंदुओं का विश्लेषण भी कराया जाएगा।

राज्य में गुलदार
गणना वर्षसंख्या
20223115
20082335
20052105
20032092



हाथी गणना भी इसी वर्ष

राज्य में यमुना से लेकर शारदा नदी तक राजाजी व कार्बेट टाइगर रिजर्व समेत 12 वन प्रभागों में फैले हाथियों के बसेरे में इनकी गणना की जाएगी। वर्ष 2003 की गणना में राज्य में हाथियों की संख्या 1582 थी, जो वर्ष 2020 में बढ़कर 2026 हो गई। इसके बाद अब जाकर हाथी गणना होने जा रही है। वन विभाग इसे भी भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से करेगा।




इस वर्ष गुलदारों की गणना के दृष्टिगत भारतीय वन्यजीव संस्थान को प्रस्ताव भेजा गया है। यह एक प्रकार का समग्र अध्ययन भी होगा। इसमें गुलदारों की संख्या तो सामने आएगी ही, इनके मूवमेंट पैटर्न, आजवाही के रास्ते, मानव से टकराव के कारणों को समझने में मदद मिलेगी। फिर इसके आधार पर कदम उठाए जाएंगे।  
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- आरके मिश्र, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखंड
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