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उत्तराखंड में दो और कम्युनिटी रेडियो स्टेशन शुरू करेगी भारतीय सेना, ग्रामीणों और सैनिकों के बीच बढ़ेगा तालमेल

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सामुदायिक रेडियो स्टेशन में सूर्य कमान के जनरल आफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता का साक्षात्कार करते आरजे



सुकांत ममगाईं, जागरण देहरादून। सैन्य छावनी क्षेत्रों में नागरिक और सैनिक संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से भारतीय सेना उत्तराखंड में दो नये सामुदायिक रेडियो स्टेशन स्थापित करने जा रही है। मध्य कमान के अलंकरण समारोह में दून पहुंचे सूर्य कमान के जनरल आफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने इसकी जानकारी की।

उन्होंने बताया कि एक रेडियो स्टेशन कुमाऊं मंडल के रानीखेत और दूसरा गढ़वाल मंडल के लैंसडौन में स्थापित किया जाएगा। इन दोनों स्टेशनों के शुरू होने के बाद राज्य में सेना द्वारा संचालित सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की संख्या बढ़कर पांच हो जाएगी।

वर्तमान में ज्योतिर्मठ, हर्षिल और पिथौरागढ़ में सामुदायिक रेडियो स्टेशन संचालित हैं। इनका मुख्य उद्देश्य सेना और स्थानीय नागरिकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण और अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना है।

बता दें कि रानीखेत और लैंसडौन दोनों ही ऐतिहासिक सैन्य छावनी क्षेत्र हैं। रानीखेत कुमाऊं रेजिमेंट का मुख्यालय है, जबकि लैंसडौन में गढ़वाल राइफल्स का रेजिमेंटल सेंटर है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों की बसावट है। सेना का मानना है कि सामुदायिक रेडियो के माध्यम से पूर्व सैनिकों, स्थानीय युवाओं और ग्रामीण समुदायों से सीधा संवाद स्थापित किया जा सकेगा।

सेना अधिकारियों के अनुसार, इन रेडियो स्टेशनों के जरिये शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल साक्षरता, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रसारित की जाएंगी। साथ ही युवाओं में सैन्य सेवा के प्रति जागरूकता और प्रेरित किया जा सकेगा।

जनसंपर्क अधिकारी (रक्षा) कर्नल मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि यह पहल सेना व आम जन के बीच विश्वास और सहभागिता को सुदृढ़ करने के साथ युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी।

उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। ऐसे में दूरस्थ क्षेत्रों में स्थापित रेडियो स्टेशन की उपयोगिता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यह इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर नहीं होता। प्राकृतिक आपदा या संचार बाधित होने की स्थिति में भी रेडियो त्वरित और भरोसेमंद सूचना उपलब्ध कराने में सक्षम रहता है।

सेना की यह पहल न केवल सूचना तंत्र को मजबूत करेगी, बल्कि सीमांत व दूरस्थ क्षेत्रों में सामाजिक समरसता और सामुदायिक सशक्तीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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