वायु गुणवत्ता संभालने के लिए अब दिल्ली-NCR में सालभर चलेगी जंग (फाइल फोटो)
अरविंद पांडेय, नई दिल्ली। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली समेत एनसीआर के राज्यों की सक्रियता अब सिर्फ उसके बढ़ने पर ही नहीं दिखेगी बल्कि अब वह इससे निपटने के लिए साल भर काम करते हुए दिखेंगे।इसे लेकर सभी राज्यों ने अब अपना एक सालाना प्लान तैयार किया है।
साथ ही उसे केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ( सीएक्यूएम) के साथ साझा किया है। इसके अमल की अब प्रत्येक महीने समीक्षा भी होगी। बड़ी बात ये है कि सभी राज्यों व निकायों ने अपने प्लान पर काम भी शुरू कर दिया है।
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और सीएक्यूएम के मुताबिक पहली बार एनसीआर के सभी राज्यों व नगरीय निकायों ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए महीने वार सालाना प्लान बनाया है।
इसमें उन्होंने बताया है कि किस महीने में वे इससे निपटने के लिए क्या-क्या कदम उठाएंगे। जैसे दिल्ली ने जनवरी महीने में अवैध रूप से चल रहे उद्योगों व कचरे को जलाने से रोकने के लिए विशेष अभियान छेड़ा हुआ है। साथ ही सड़कों की पानी से सफाई करने जैसे भी कदम उठाए हैं ताकि सड़कों से उठने वाली धूल को पूरी तरह से समाप्त किया जा सकें।
मंत्रालय व सीएक्यूएम से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक एनसीआर के बाकी राज्यों व नगरीय निकायों से भी स्थानीय स्तर पर प्रदूषण बढ़ाने वाले कारणों के आधार पर उससे निपटने के लिए प्लान बनाए हैं।
गौरतलब है कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने पिछले कुछ हफ्तों में एनसीआर के प्रत्येक राज्यों व निकायों के साथ वायु प्रदूषण से निपटने के प्लान पर अलग-अलग चर्चा भी की है। एनसीआर में दिल्ली के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के जिले शामिल हैं।
प्लान के अमल की होगी कड़ी निगरानी
वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अब तक बने प्लान और उनके हश्र को देखते मंत्रालय और सीएक्यूएम ने इस बार इसके अमल पर कड़ी निगरानी रखने की भी रणनीति बनाई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और मंत्रालय के अमले को मिलाकर 40 टीमें गठित की गई हैं जोकि सप्ताह में एक या दो दिन राज्यों और निकायों का दौरा करेंगी और दिए गए प्लान के अमल को जांचेगी।
यही नहीं, पड़ताल के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को भी 25 टीमें गठित करने के लिए कहा गया है जोकि सीएक्यूएम के बताए गए स्थलों या क्षेत्रों को जांचेगी और रिपोर्ट देंगी। निरीक्षण के बाद यदि संज्ञान में लाई गई गड़बड़ी दूसरी बार भी जांच में मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
यह प्लान नहीं वादा है, राज्यों की तय होगी जवाबदेही
प्लान में दिए गए आश्वासन के तहत काम न करने पर मंत्रालय और सीएक्यूएम संबंधित राज्यों और निकायों की जवाबदेही भी तय करेंगे। सीएक्यूएम के सचिव तरुण पिथोड़े ने कहा कि यह प्लान नहीं है बल्कि राज्यऔर निकाय वायु प्रदूषण से निपटने के लिए क्या-क्या कदम कब-कब उठाएंगे, उन्होंने इसका एक वादा किया है और इसे उन्हें पूरा करना ही होगा। यदि उन्हें किसी स्तर पर कठिनाई आती है तो उसका समाधान भी निकाला जाएगा, लेकिन किसी भी स्तर पर ढिलाई अब नहीं चलेगी।
वाहन प्रदूषण थामने के लिए बनेगा नया पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्लान
एनसीआर में बढ़े वायु प्रदूषण में एक बड़ी हिस्सेदारी वाहनों से होने वाले प्रदूषण की है। इन्हें बंद भी नहीं किया जा सकता है। यही वजह है कि मंत्रालय और सीएक्यूएम ने एनसीआर के सभी राज्यों व निकायों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सशक्त बनाने के लिए अलग से प्लान बनाने को कहा हैताकि लोग निजी वाहनों के इस्तेमाल को छोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ओर आकर्षित हों।
इसके तहत मेट्रोलाइन को और विस्तार देने, मेट्रो स्टेशन बढ़ाने, बसों की संख्या करीब तीन गुना बढ़ाने, ई वाहनों को बढ़ावा देने व ज्यादा चार्जिंग स्टेशन बनाने जैसी पहल शामिल हैं। इस दौरान दिल्ली मेट्रो की एक स्टडी रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया, जिसमें बताया गया है कि मेट्रो के विस्तार से एनसीआर में करीब चार लाख वाहन कम हुए हैं। |
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