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दंपतियों के बांझपन के लिए पुरुष भी होते हैं जिम्मेदार (सांकेतिक तस्वीर)
पीटीआई, नई दिल्ली। आम तौर पर बच्चे नहीं होने के लिए महिलाओं को जिम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन एक नए अध्ययन में यह पता चला है कि बांझपन के लिए पुरुष भी जिम्मेदार होते हैं। जेनेटिक तकनीक से पुरुषोंमें बांझपन के कारण का पता लगाया जा सकता है।
यह अध्ययन संतान के लिए तरस रहे दंपतियों के लिए उम्मीद की किरण है। दरअसल बांझपन से जूझ रहे कई दंपतियों के लिए सबसे अधिकहताश करने वाली बात यह है कि इलाज केबावजूद गर्भधारण नहीं कर पाने का कारण डॉक्टर उन्हें नहीं समझा पाते।
भारत में किए गए इस अध्ययन में दावा किया गया है कि नई जेनेटिक तकनीक से उनके इस सवाल का जवाब मिल सकता है। यह अध्ययन भारत में विकसितनवाचार को भी उजागर करता है।
\“जर्नल आफ असिस्टेड रिप्रोडक्शन एंड जेनेटिक्स\“ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, 2021 और 2024 के बीच गंभीर शुक्राणु समस्याओं से ग्रस्त 247 भारतीय पुरुषों का विश्लेषण किया गया।
यह अध्ययन अहमदाबाद स्थित फ्रिगे इंस्टीट्यूट आफ ह्यूमन जेनेटिक्स ने आइसीएमआर (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) के सहयोग से किया। यह भारत में अब तक किया गया पुरुष बांझपन का सबसे बड़ा और सबसे व्यवस्थित जेनेटिक अध्ययन है और विश्व स्तर पर उन कुछ अध्ययनों में से एक है, जिसमें परिवार-आधारित जेनेटिक विश्लेषण का उपयोग किया गया है।
अध्ययन में कहा गया कि पुरुष देखने में स्वस्थ लग सकता है, और नियमित ब्लड टेस्ट के परिणाम भी सामान्य हो सकते हैं, लेकिन वीर्य की जांच करने पर या तो शुक्राणु बिल्कुल नहीं मिलते या उनकी संख्या बहुत कम होती है। दुर्भाग्यवश, अधिकांश मामलों में इसका कारण पता नहीं चलता।
अधिकांश बांझपन क्लीनिक गुणसूत्र विश्लेषण और वाई-गुणसूत्र परीक्षण जैसे मानक जेनेटिक परीक्षणों पर निर्भर करते हैं। ये परीक्षण केवल बड़े जेनेटिक परिवर्तनों का पता लगाते हैं।
मुंबई स्थित आइसीएमआर-राष्ट्रीय प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के विज्ञानी और अध्ययन करने वाली टीम के सदस्य डॉ. दीपक मोदी ने बताया कि अध्ययन में केवल तीन पुरुषों में गुणसूत्र संबंधी असामान्यताएं औरआठ पुरुषों में वाई-गुणसूत्र माइक्रोडिलीशन या सूक्ष्म विलोपन का पता चला।
इसका मतलब यह है कि इस तरह के नियमित परीक्षण से 247 पुरुषों में से केवल 11 में ही बांझपन का कारण का पता चल सकता था। इसलिए अधिकांश पुरुषों को उनकी स्थिति का कोई स्पष्ट कारण नहीं मिल पाया।इसलिए शोधकर्ताओं ने डीएनए सीक्वेंसिंग की नई तकनीकों का उपयोग किया।
120 पुरुषों पर टारगेटेड सीक्वेंसिंग (एसएमएमआइपी-आधारित) की प्रक्रिया कीगई। 48 पुरुषों पर संपूर्ण एक्सोम सीक्वेंसिंग (डब्ल्यूइएस) की प्रक्रिया की गई, जिसमें अक्सर रोगी और दोनों माता-पिता शामिल होते हैं।
एक्सोम सीक्वेंसिंग जीन के सभी प्रोटीन-कोडिंग क्षेत्रों (जिसे एक्सोमके रूप में जाना जाता है) की सिक्वें¨सग करने के लिए जीनोमिक तकनीक है। इनसे निदान की सफलता दर में छह से आठ प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि हुई। इसके परिणामस्वरूप 247 पुरुषों में से 19 में जेनेटिक निदान की पुष्टि हुई।
अधिकांश पुरुष बांझपन जीन रिसेसिव विरासत के माध्यम से काम करते हैं, जहां एक पुरुष केवल तभी प्रभावित होता है जब वह दोनों माता-पिता से दोषपूर्ण प्राप्त करे। कुछ पुरुष जिनमें सीएफटीआर म्यूटेशन होते हैं, जिनसे शुक्राणु ले जाने वाली नलिकाएं अनुपस्थित या अवरुद्ध होती हैं।
जेनेटिक परीक्षण के बिना, यह पहचान में नहीं आ सकता। नई तकनीक के आविष्कारक डॉ हार्श शेट ने कहा, टीम द्वारा उपयोग कीगई टररगेटेड सीक्वेंसिंग विधि एक पेटेंट तकनीक पर आधारित है जिसे एक ही परीक्षण में कई आनुवंशिक असामानताएं पहचानने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे समय और धन की बचत होती है। |
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