केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ प्री बजट बैठक में उपस्थित बिहार के गृह मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव।
राज्य ब्यूरो, पटना। Pre Budget Meeting: चालू योजनाओं को जारी रखने के साथ चुनावी वादों को पूरा करने के लिए बिहार सरकार को अतिरिक्त धन का प्रबंध करना है।
इसके लिए केंद्र से अनुदान के साथ खुले बाजार से अधिक ऋण की अपेक्षा है। बजट पूर्व चर्चा के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बिहार की अपेक्षाओं से अवगत करा दिया है।
बिहार के विकास से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए उन्होंने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (एसजीडीपी) की तुलना में दो प्रतिशत अतिरिक्त ऋण लेने के लिए अनुमति देने का आग्रह किया।
कहा कि बिहार की प्रति व्यक्ति आय को राष्ट्रीय औसत के बराबर लाने के लिए अधिक उधारी की आवश्यकता है। यानी कि बिहार सरकार अब एसजीडीपी की तुलना में पांच प्रतिशत ऋण की अपेक्षा रख रही।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार में वर्तमान मूल्य पर एसजीडीपी 1097264 करोड़ रुपये अनुमानित है और इसकी तुलना में अधिकतम तीन प्रतिशत ऋण के लिए अनुमति है।
- सेस और सरचार्ज मेंं हिस्सेदारी के साथ विशेष बाढ़ राहत पैकेज की हुई मांग
- 5 प्रतिशत तक ऋण लेना चाहता है बिहार जीएसडीपी की तुलना में
- अभी अनुमति अधिकतम तीन प्रतिशत की
बिहार की वस्तुस्थिति
वित्तीय वर्ष : जीएसडीपी : लोक ऋण : जीएसडीपी की तुलना में लोक ऋण
2025-26 : 1097264 करोड़ : 353819.11 करोड़ : 32.25 प्रतिशत
2024-25 : 976514 करोड़ : 309379.31 करोड़ : 31.68 प्रतिशत
बिहार में वित्तीय वर्ष 2024-25 में वर्तमान मूल्य पर 13.09 प्रतिशत की विकास दर का हवाला देते हुए बिजेंद्र ने कहा कि कल्याणोन्मुखी विकास कार्यक्रमों मेंं तेजी लाने और मानव पूंजी को मजबूती देने के लिए बिहार सरकार ने सात निश्चय के तीसरे चरण की शुरुआत की है।
इसके लिए केंद्र से पर्याप्त आर्थिक सहायता चाहिए। उन्होंने ब्याज रहित ऋण की सीमा 50 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये करने का अनुरोध किया।
2026-27 के लिए केंद्रीय बजट में अतिरिक्त ऋण-सीमा के साथ उप-कर (सेस) के विभाज्य कोष में विलय और विशेष बाढ़ राहत पैकेज की भी मांग की।
सेस पर अभी तक केंद्र का अधिकार है। इसके विभाज्य कोष में विलय के बाद बिहार को अतिरिक्त धन की आवक होगी।
सेस और सरचार्ज में हिस्सेदारी की अपेक्षा
बिजेंद्र ने कहा कि कुल कर राजस्व में सेस और अधिभारों (सरचार्ज) की हिस्सेदारी वर्ष 2011-12 के 10.4 प्रतिशत से बढ़कर अब 13.6% हो गई है।
चूंकि ये केंद्र के विभाज्य कोष का हिस्सा नहीं होते, इसलिए बिहार जैसे राज्यों को उनके संवैधानिक हिस्से का नुकसान हो रहा है।
बाढ़-सुखाड़ से बचाव के लिए विशेष पैकेज
उत्तरी बिहार में कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियों से होने वाली भीषण तबाही को रोकने के लिए उन्होंने \“\“रिलीफ एवं डिजास्टर रिजिलिएंट पैकेज\“\“ का अनुरोध किया।
इसमें सैटेलाइट पूर्वानुमान, जीआइएस मैपिंग और रियल-टाइम मानीटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया गया है। साथ ही, बाढ़ और सूखे के स्थायी समाधान हेतु नदी जोड़ो परियोजना को प्राथमिकता देने की अपील की गई।
कृषि में आधुनिक तकनीक और औद्योगिक विकास
राज्य में रोजगार सृजन हेतु कृषि क्षेत्र में एआइ, ड्रोन और ब्लाकचेन जैसी नई तकनीकों पर आधारित केंद्र प्रायोजित योजनाओं की आवश्यकता जताई गई।
प्रचुर जल संसाधन और कुशल श्रम की उपलब्धता को देखते हुए राज्य में नए उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष सहयोग की मांग की गई। |
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