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पश्चिम बंगाल के हल्दिया में बनने जा रहा नया नेवी बेस... बांग्लादेश-चीन पर रहेगी पैनी नजर

Chikheang 2026-1-10 20:01:01 views 829
भारतीय नौसेना पश्चिम बंगाल के हल्दिया में एक नया नेवी बेस बनाने जा रही है। इंडिया टुडे ने रक्षा सूत्रों के हवाले से ये खबर दी है। बढ़ती चीनी नौसैनिक गतिविधियों और बांग्लादेश व पाकिस्तान से जुड़े क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को देखते हुए, भारतीय नौसेना उत्तरी बंगाल की खाड़ी इलाके में अपनी मौजूदगी मजबूत करने जा रही है। इसके लिए हल्दिया (पश्चिम बंगाल) में एक नया नौसैनिक बेस बनाया जाएगा।





जानकारी के मुताबिक, बेस एक छोटे नौसैनिक “डिटैचमेंट” के तौर पर काम करेगा। यहां से मुख्य रूप से छोटे युद्धपोतों की तैनाती की जाएगी। यह नया नौसैनिक ठिकाना हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स की मौजूदा सुविधाओं का इस्तेमाल करेगा। इससे बिना ज्यादा नया ढांचा बनाए, बेस को जल्दी शुरू किया जा सकेगा। शुरुआती चरण में यहां एक अलग जेट्टी और जरूरी तटीय सहायक सुविधाएं बनाई जाएंगी।





हल्दिया में बनने वाले इस नौसैनिक बेस पर फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (FIC) और 300 टन वज़न वाले न्यू वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट (NWJFAC) तैनात किए जाने की उम्मीद है। ये सभी तेज़ रफ्तार नौकाएं होंगी। ये जहाज 40 से 45 समुद्री मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकते हैं और इन्हें खास तौर पर तुरंत कार्रवाई वाले समुद्री अभियानों के लिए बनाया गया है। इन नौकाओं में CRN-91 तोपें लगी होंगी। साथ ही इनमें नागस्त्र जैसी आधुनिक ड्रोन-आधारित हथियार प्रणालियां भी जोड़ी जा सकती हैं। इससे इनकी निशाने की सटीकता और निगरानी क्षमता दोनों और मजबूत हो जाएंगी।





नेवल बेस क्यों जरूरी है





एक्सपर्ट का कहना है कि उत्तरी बंगाल की खाड़ी में नया नौसैनिक बेस बनाना कई वजहों से जरूरी हो गया है। इनमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) की हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियां, समुद्र के रास्ते घुसपैठ की आशंका और बांग्लादेश से समुद्री रास्तों के जरिए भारत में अवैध प्रवेश के मामले शामिल हैं। भारत-बांग्लादेश तट के पास समुद्र का पानी कई जगह उथला है और वहां जहाज़ों की आवाजाही भी काफी ज्यादा रहती है। ऐसे इलाकों में तेज़ और फुर्तीले नौसैनिक प्लेटफॉर्म निगरानी, रोकथाम और संदिग्ध गतिविधियों को रोकने में बहुत कारगर साबित होते हैं।




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इसके अलावा, चीन का हिंद महासागर में बढ़ता नौसैनिक प्रभाव, बांग्लादेश के साथ उसके मजबूत रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर संबंध, और पाकिस्तान के साथ उसकी पुरानी सैन्य साझेदारी को देखते हुए हल्दिया नौसैनिक बेस का रणनीतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।





करीब 100 नेवी ऑफिसर्स होंगे तैनात





हल्दिया में बनने वाला नया नौसैनिक बेस आकार में छोटा होगा। इसमें करीब 100 नौसेना अधिकारी और नाविक तैनात किए जाएंगे। इससे साफ है कि यह कोई बड़ा कमांड सेंटर नहीं होगा, बल्कि एक सीमित लेकिन अहम बेस के तौर पर काम करेगा। यह बेस कोलकाता से लगभग 100 किलोमीटर दूर होगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां से बंगाल की खाड़ी तक सीधी पहुंच मिलेगी। इससे हुगली नदी के रास्ते होने वाले लंबे और समय लेने वाले सफर से बचा जा सकेगा।





फिलहाल भारतीय नौसेना पूर्वी तट पर कई बड़े नौसैनिक ठिकाने चला रही है। इनमें विशाखापत्तनम में स्थित पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मौजूद अहम नौसैनिक बेस शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जिस ज़मीन पर अब हल्दिया बेस बनाया जा रहा है, वह पहले भी इसी उद्देश्य के लिए तय की गई थी, लेकिन कुछ समय से वहां निर्माण कार्य रुका हुआ था।





बता दें कि, साल 2024 में राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट और 31 न्यू वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट (NWJFAC) खरीदने की मंजूरी दी थी। ये जहाज आमतौर पर करीब 100 टन वज़न के होते हैं और इनमें 10 से 12 लोग सवार हो सकते हैं। इनका इस्तेमाल तटीय इलाकों की निगरानी, घुसपैठ रोकने, बंदरगाहों की सुरक्षा और खास सैन्य अभियानों में किया जाता है। एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह की नौसैनिक तैनाती से भारत समुद्री रास्तों को सुरक्षित रख पाएगा, क्षेत्रीय गतिविधियों पर बेहतर नज़र रख सकेगा और हिंद महासागर क्षेत्र में मुख्य सुरक्षा प्रदाता के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगा।
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