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डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक खेल: शौचालय से सोने तक निगरानी रख ठग लिए 17 लाख, पढ़ें एयरफोर्स के रिटायर आफिसर की आपबीती

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जागरण संवाददाता, कानपुर। चकेरी पुलिस ने साइबर ठगो ने एयरफोर्स सेवानिवृत मास्टर वारंट आफीसर को पत्नी समेत तीन दिन डिजिटल अरेस्ट रख 17.5 लाख हड़प लिए। मामले में ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने मुकदमा दर्ज किया है। आरोपितों ने पीड़ित पर मुंबई में बैंक संचालित करने समेत अवैध लेनदेन का आरोप लगाकर झांसे में लिया। मामले में चकेरी पुलिस मुकदमा दर्ज कर साइबर सेल की मदद से आरोपित साइबर ठगों की तलाश कर रही है । वहीं, घटना के बाद से पीड़ित मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं।

  

चकेरी थाना के सफीपुर निवासी पीड़ित बलवीर सिंह ने बताया कि वह वायुसेना से मास्टरवारंट आफीसर के पद से सेवानिवृत हैं, वह मकान में अपनी पत्नी हरजीत कौर के साथ रहते हैं, आगे तहरीर में बताया कि उनके पास 13 नवंबर 2025 को अज्ञात व्यक्तियों ने मुझे काल किया। फिर खुद को सीबीआई समेत अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताया। इसके बाद उनका आधार कार्ड दिखाते हुए दावा कर आरोप लगाया कि इस आधार कार्ड के उपयोग मुंबई में एक बैंक खोलने के लिए हुआ है, इस बैंक से अवैध लेन-देन हुए हैं। कहा कि उनका आधार इस्तेमाल होने के कारण वह मुंबई के इस बैंक के मालिक हुए। इसलिए अवैध लेनदेन के अपराधों के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हैं।
कई बार लगाई गुहार

पीड़ित के अनुसार उन्होंने आरोपियों से कई बार कहा कि उनका इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। लेकिन, वह तीन दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर लगातार आरोप लगाकर दबाव बनाते रहे। आरोपित साइबर ठगों ने कहा कि क्राइम ब्रांच असली अपराधियों को खोज नहीं पा रही है, इसलिए उनसे पूछताछ की जा रही है। फिर उन्होंने गिरफ्तारी की धमकी भी दी। वहीं, अवैध लेनदेन की जिम्मेदारी स्वीकारने के लिए मजबूर किया गया। इस दौरान आरोपितों ने परिवार के संबंध में भी जानकारी ली। फिर , पत्नी हरजीत कौर को भी वीडियो काल पर बुला कर लगातार निगरानी करते रहे और फोन बंद न करने की बात कहते रहे।
बहुत डरा दिया था

पीड़ित के अनुसार आरोपितों ने इतना डरा दिया कि शौचालय जाने, सोने और किसी भी बाहरी व्यक्ति से संपर्क करने की भी अनुमति नहीं थी। इस दौरान उन्होंने एक नकली वेरिफिकेशन प्रक्रिया भी दिखाई। फिर वारंट भेजकर कहा, कि उनके मामले की सुनवाई के लिए एक जज नियुक्त किया जाएगा । जो उनके मामले की सुनवाई कर फैसला देगा। पीड़ित के अनुसार दबाव बनाकर अपने ही घर में कैद जैसा माहौल तैयार किया। फिर, मामला निपटाने के लिए रुपयों की मांग शुरू की । इसपर उन्होंने 14 नवंबर 2025 को उनके बताए खाते श्री प्रकाश (खाता संख्या 20410894277, पेमेंट बैंक) पर साढ़े बारह लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
पारिवारिक परिचित से रुपये उधार लिए

पीड़ित बलवीर सिंह के अनुसार इसके दूसरे दिन 15 नवंबर 2025 को फिर आरोपितों ने कोर्ट और वकील फीस के नाम पर 5 लाख रुपयों की मांग की। लेकिन , इतनी रकम मेरे पास नहीं थी। इसपर उन्होंने अपने एक पारिवारिक परिचित से रुपये उधार लेकर उनके बताए खाते ( सुपर ट्रेडर्स, खाता संख्या: 0838102100001932 ) पर पांच लाख रुपये नकद जमा किए। इसके बाद जब उन्होंने संपर्क करने की कोशिश की। तो आरोपितों ने फोन उठाना बंद कर दिया। इसके बाद उन्हें अपने साथ हुई ठगी का पता चला। मामले में थाना प्रभारी अजय कुमार मिश्र का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर साइबर सेल की मदद से आरोपितों की तलाश की जा रही है।

  
गोल्डन आवर में दर्ज कराएं शिकायत

गोल्डन आवर का मतलब 60 मिनट से है। पीड़ित अगर तय समय के भीतर 1930 पर काल कर सही तथ्यों के साथ ठगी की जानकारी देते हैं तो वहां बैठे अधिकारी उनकी शिकायत साइबर सेल की वेबसाइट cybercrime.gov.in पर दर्ज कर लेते हैं। इसके बाद जिस बैंक के खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई होती है, वहां की साइबर सेल उन रुपयों को फ्रीज कर देती है। सभी बैंकों की साइबर सेल 24 घंटे खुली रहती है।
इन बातों का रखें खास ध्यान

  • अनजाने लिंक को क्लिक न करें
  • अनजाने एप इंस्टाल न करें
  • गेमिंग एप पर सट्टा न लगाएं
  • बैकिंग और यूपीआइ एप में हमेशा पिन, बायोमीट्रिक को डिवाइस से अलग रखें
  • वीडियो/ फोटो का सत्यापन जरूर करें, कहीं वह डीपफेक तो नहीं
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