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ऐसा क्‍या हुआ कि जवानी में आते ही बाघिन को मिली आजीवन कैद? अब रेस्क्यू सेंटर में ही रहेगी

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बाघिन के हमलावर होने के सारे साक्ष्य विभाग पर मौजूद।  कार्बेट



जवानी में आते ही बाघिन को मिली आजीवन कैद, अब रेस्क्यू सेंटर में ही रहेगी --भलोन से पकड़ी गई युवा व्यस्क बाघिन, बाघिन के हमलावर होने के सारे साक्ष्य विभाग पर मौजूद, श्रमिक को मारकर आसपास ही मंडरा रही थी बाघिन, लोकेशन भी हो रही थी ट्रेसफोटो: युवा व्यस्क बाघिन की फोटो। कार्बेट

जागरण संवाददाता, रामनगर। कालागढ़ से सौ किलोमीटर का सफर तय कर भलोन गांव में श्रमिक को हमला कर मारने वाली बाघिन को युवा अवस्था में आते ही रेस्क्यू सेंटर में उम्र भर की कैद मिल गई।

बाघिन के भलोन के साथ ही सल्ट के खौल्यो गांव में भी महिला को मारने की बात कही जा रही है। दिसंबर माह में जिला पौड़ी के किसी गांव में आने की वजह से कालागढ़ की टीम ने बाघिन को पकड़ा था। विभाग ने बाघिन को रेडियोकालर लगाकर अध्ययन के लिए कालागढ़ के प्लेन के घने जंगल में छोड़ दिया था।

बाघिन जंगल से होते हुए करीब सौ किलोमीटर का सफर तय कर भलोन गांव पहुंची और उसने श्रमिक को मार दिया। जहां उसे पांच घंटे के भीतर पकड़ लिया था। अब बाघिन को कार्बेट टाइगर रिजर्व के रेस्क्यू सेंटर में ही आजीवन रखा जाएगा। बाघिन का पूरा जीवन अब रेस्क्यू सेंटर में ही गुजरेगा। क्योंकि विभाग पर बाघिन के श्रमिक पर हमले के पूरे साक्ष्य मौजूद है। घटना के दिन बाघिन श्रमिक को मारने वाली जगह पर ही मंडरा रही थी।

वह पांच घंटे के भीतर श्रमिक के खून से सने कपड़े में आई और उसे ट्रैंकुलाइज कर लिया गया। वहां अन्य दूसरे बाघ की मौजूदगी भी नहीं थी। उसकी रेडियोकालर की लोकेशन भी विभाग पर मौजूद है। ऐसे में रेस्क्यू सेंटर में उसकी रिहाई नहीं होगी। अब अल्मोड़ा वन प्रभाग के सल्ट के रेंजर ने भी पगमार्क के आधार पर इसी बाघिन पर सल्ट में महिला को मारने में शामिल होने की बात कही है। आजीवन कैद इसलिए भी कि रेस्क्यू सेंटर में लंबे समय तक रखने के बाद बाघ बाघिन शिकार करने का अभ्यास भूल जाते हैं। ऐसे में उन्हें जंगल छोड़ दें तो वह फिर आबादी में आकर मानव वन्य जीव संघर्ष का कारण बनेंगे।
उम्र दो साल से ढाई साल

रामनगर: बाघिन युवा व्यस्क है। दो साल से ढाई साल उसकी उम्र आंकी जा रही है। यह उम्र शिकार का प्रशिक्षण लेने के बाद मां से अलग होने की होती है। मां से अलग हुए बाघ बाघिन अपने लिए जंगल में क्षेत्र निर्धारित करते हें। लेकिन यह बाघिन किसी क्षेत्र में नहीं रही और लगातार बाघों से बचकर आगे बढ़ती रही।


भलोन में पकड़ी गई बाघिन रेस्क्यू सेंटर में ही रहेगी। इस समय ढेला रेस्क्यू सेंटर में जो भी बाघ हैं, उसमें सांवल्दे के जंगल से पकड़ा बाघ ही संदिग्ध है। जिसका डीएनए कराया जाना है। जरूरत हुई तो बाघिन का भी डीएनए एक बार कराया लिया जाएगा। - साकेत बडोला, निदेशक सीटीआर



यह भी पढ़ें- अल्मोड़ा और रामनगर में एक ही बाघिन ने किया हमला, पगमार्क्स के मिलान से हुआ खुलासा  



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