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कयलू मंदिर में चढ़ाया चुराच का पहला बकरा, जोनसार-बावर में एक माह तक मनाए जाने वाला माघ मरोज पर्व शुरू

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शुक्रवार सुबह कयलू मंदिर हनोल में विधि विधान से हुई पूजा अर्चना।



संवाद सूत्र, जागरण, त्यूणी (देहरादून) : कयलू मंदिर हनोल में शुक्रवार को विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ चुराच का पहला बकरा चढ़ाया गया। इसके साथ ही जौनसार बावर में एक माह तक मनाए जाने वाले लोक पर्व माघ मरोज की शुरुआत हुई। अब क्षेत्र की सभी 39 खतों में उत्सव के माहौल में लोग अतिथि सत्कार की परंपरा निभाएंगे। इस बीच पंचायती आंगन सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गुलजार रहेंगे।

लोक मान्यता के अनुसार पौष महीने की 26वीं तिथि को चुराच का बकरा चढ़ने की परंपरा है। टोंस व यमुना घाटी से जुड़े पर्वतीय क्षेत्र में माघ मरोज पर्व मनाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। स्थानीय लोग अपने करीबियों और रिश्तेदारों को घरों में दावत पर बुलाते हैं।

जौनसार बावर के अलावा सीमावर्ती उत्तरकाशी जनपद के बंगाण क्षेत्र, रवांई घाटी के जौनपुर व हिमाचल प्रदेश के सिरमौर क्षेत्र में भी लोक पर्व माघ मरोज मनाने की परंपरा है। इस पर्व के माध्यम से स्थानीय लोग घरों में सहभोज के साथ लोकनृत्य के माध्यम से समाज की नई पीढ़ी को लोक मान्यता व सांस्कृतिक विरासत से अवगत करा रहे हैं।
11 खतों में किसराट पर्व

अब शनिवार को बावर-देवघार क्षेत्र से जुड़ी 11 खतों में किसराट का लोक पर्व मनाया जाएगा। जौनसार बावर की अन्य खतों में रविवार व सोमवार को लोक उत्सव का परंपरागत जश्न शुरू होगा।

किसराट के दिन स्थानीय लोग घरों में लाल चावल व उड़द की खिचड़ी बनाते हैं, जिसे मशियाड़ा भात कहते हैं। सुबह के भोजन में लोग मशियाड़ा भात को अखरोट, भंगजीरा, तिल और घी के साथ बड़े चाव से खाते हैं। वहीं शाम के भोजन में पहाड़ी लाल चावल, रोटी व बकरे का मीट परोसा जाता है।

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