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सोशल मीडिया पोस्ट से सियासत गरमाई, जीतन राम मांझी ने कहा - भारत रत्न नीतीश कुमार... कितना अच्छा लगेगा ना !

LHC0088 2026-1-10 13:26:49 views 1248
  

भारत रत्न को लेकर छिड़ी बहस



राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार की सियासत में भारत रत्न को लेकर छिड़ी बहस के बीच अब केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक जीतन राम मांझी भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। मांझी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की सिफारिश की है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

जीतन राम मांझी ने अपने पोस्ट में लिखा, \“भारत रत्न नीतीश कुमार जी… ये शब्द सुनने में कितना अच्छा लगेगा ना। हमें पूर्ण विश्वास है कि अपने फैसले से सबको चौंका देने वाले माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी बिहार के माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी को भारत रत्न से नवाजे जाने का फैसला कर एक बार फिर से सबको चौंकाएंगे।\“ मांझी ने अपनी पोस्ट के अंत में फिर दोहराया— \“भारत रत्न नीतीश कुमार…\“

मांझी के इस बयान को नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक और सामाजिक योगदान से जोड़कर देखा जा रहा है।

बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने सुशासन, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई बड़े फैसले लिए हैं।

खासकर शराबबंदी, बालिका शिक्षा को बढ़ावा, पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण और सड़क-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को उनके प्रमुख कार्यों में गिना जाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मांझी का यह बयान केवल सम्मान की मांग भर नहीं है, बल्कि इसके सियासी मायने भी हैं।

हाल के दिनों में जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी द्वारा नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग पर पार्टी ने सार्वजनिक रूप से किनारा कर लिया था।

ऐसे में एनडीए सहयोगी जीतन राम मांझी का समर्थन सामने आना इस बहस को नया मोड़ देता है।

मांझी और नीतीश कुमार का रिश्ता राजनीतिक उतार-चढ़ाव से भरा रहा है, लेकिन मौजूदा समय में दोनों एनडीए के मजबूत सहयोगी हैं।

मांझी का यह बयान एनडीए के भीतर नीतीश कुमार की स्वीकार्यता और सम्मान को रेखांकित करता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की भूमिका अब केवल राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर उनके योगदान को मान्यता दिए जाने की मांग उठ रही है।

हालांकि भारत रत्न जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार का होता है, लेकिन लगातार विभिन्न राजनीतिक नेताओं की ओर से उठ रही मांगों ने इस मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जीतन राम मांझी के बयान के बाद यह साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में भारत रत्न को लेकर बहस और तेज हो सकती है।
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