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संवाद सहयोगी, हथौड़ी (मुजफ्फरपुर)। करीब साढ़े तीन वर्ष पूर्व झोलाछाप और अव्यवस्था की भेंट चढ़ी सुनीता कुमारी की पिछले साल हुई मौत के बाद भी स्वास्थ्य महकमा सोया ही रहा। सुनीता की मौत का अभी इंसाफ भी नहीं हो पाया कि उसकी ही तरह एक और महिला झोलाछाप और अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई।
हथौड़ी थाना क्षेत्र में बिना चिकित्सक और उपकरण वाले हथौड़ी चौक स्थित हरिओम नर्सिग होम में टेबल पर ही शुक्रवार सुबह गर्भाशय का ऑपरेशन करने के लिए अम्मा निवासी रागिनी देवी (32) को लिटा दिया। ऑपरेशन से पहले उसे एनेस्थिसिया दी गई। इसके बाद ही उसकी हालत बिगड़ी गई।
आनन-फानन में उसे बखरी रोड स्थित एक निजी अस्पताल भेजा गया। वहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। रागिनी की मौत के बाद स्वजन उसका शव लेकर हरिओम नर्सिंग होम पहुंचे। नर्सिंग होम संचालक एवं झाेलाछाप हरिओम यादव पर गलत दवा देने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
पति चुन्नी लाल साह ने कहा कि हरिओम ने रागिनी के गर्भाशय में गांठ की बात कही थी। उसके ऑपरेशन के लिए गुरुवार शाम रागिनी को हरिओम नर्सिंग होम में भर्ती किया गया था। सुबह ऑपरेशन होना था। उससे पहले बेहोशी की जो दवा थी, उसके बाद ही तबीयत बिगड़ गई। उसे बचाया नहीं जा सका।
हंगामा बढ़ता देख किसी ने पुलिस को सूचना दी। घटनास्थल पर पुलिस पहुंची। साथ ही झोलाछाप ने स्थानीय नेताओं से मध्यस्थता कराई। माना जा रहा है कि इसके बाद ही समझौता हो गया। स्वजन ने शिकायत दर्ज नहीं कराई। हथौड़ी थानाध्यक्ष विक्की कुमार से इस बावत पूछा गया तो बताया कि घटना की शिकायत नहीं की गई है।
बोर्ड पर MBBS की पढ़ाई कर रहे पुत्र का भी नाम
नर्सिंग होम में संचालक का नाम नहीं है। इलाके में लोग डॉ. हरि को ही संचालक समझते हैं। वहीं, इसके बोर्ड पर चार चिकित्सक डॉ. विकास कुमार, डा कुंदन कुमार, प्रियंका राय और डा. कृष्ण मोहन का नाम है। इनमें से डॉ. कृष्ण मोहन हरिओम का पुत्र बताया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार डॉ. कृष्ण मोहन अभी MBBS की पढ़ाई ही सासाराम मेडिकल कॉलेज से कर रहा है। उसका नाम बोर्ड में डाल दिया गया है। इसके अलावा जिन चिकित्सकों के नाम बोर्ड पर हैं, वह बस दिखावा के लिए है। इसका निबंधन भी नहीं है।
घटना के बाद से संचालक के फरार हाेने से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इस बारे में थानाध्यक्ष से जब सवाल किया गया तो घटना के बाद कई बातें सामने आई हैं। आगे जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
जांच के नाम पर जिले में खेल
जिले में नर्सिंग होम एवं अस्पतालों की जांच चलती रहती है। इन जांच में बिना निबंधन और चिकित्सक के चल रहे नर्सिंग होम या अस्पताल की जानकारी नहीं मिल पाती।
इस तरह की घटना के बाद विभाग जांच की बात कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देता है। आखिर सुनीता, रागिनी.....जैसी कितनी महिलाएं झोलाछाप की शिकार होती रहेगी, यह सवाल उठ रहा है।
नर्सिंग होम की जांच बोचहां पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी से कराई जाएगी। इसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि नर्सिंग होम कैसे चल रहा था। रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी। -डॉ. अजय कुमार, सिविल सर्जन |
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