आरा सदर अस्पताल
अरुण प्रसाद, आरा। जिले की 34 लाख आबादी के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले सदर अस्पताल का आईसीयू उद्घाटन के 11 वर्ष बाद भी नियमित रूप से चालू नहीं हो सका है। 2 अक्टूबर 2014 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह ने इसका उद्घाटन किया था।
उस समय जिलेवासियों को उम्मीद जगी थी कि अब गंभीर मरीजों को बेहतर गहन चिकित्सा सुविधा यहीं मिलेगी, लेकिन यह उम्मीद अधूरी रह गई। कोरोना काल को छोड़ दें तो आईसीयू में अधिकतर समय ताला ही लटका रहा।
इधर 20 करोड़ की लागत से बने नए मॉडल अस्पताल भवन में भी अत्याधुनिक उपकरणों से लैस आईसीयू तैयार किया गया है, जहां पुराने भवन से बेड और मशीनें शिफ्ट भी कर दी गई हैं, फिर भी सेवा शुरू नहीं हो पाई है।
निजी अस्पतालों में महंगा इलाज
आईसीयू चालू नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है, जहां प्रतिदिन तीन से चार हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह भारी बोझ साबित हो रहा है।
कोरोना काल में मिली थी राहत
कोरोना संक्रमण के दौरान ऑक्सीजन प्लांट से पाइप लाइन जोड़कर आईसीयू को संचालित किया गया था। उस समय कई कीमती उपकरण लगाए गए थे। पर, संक्रमण कम होते ही सेवा बंद कर दी गई और अब सारे उपकरण निष्क्रिय पड़े हैं।
स्टाफ की कमी बनी वजह
अस्पताल सूत्रों के अनुसार प्रशिक्षित तकनीशियन और आवश्यक स्टाफ के अभाव में आईसीयू संचालन संभव नहीं हो पा रहा है। साफ-सफाई और रखरखाव भी प्रभावित है। इधर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जनहित में शीघ्र आईसीयू सेवा शुरू करने की मांग की है, ताकि सदर अस्पताल में गंभीर मरीजों को समय पर जीवनरक्षक सुविधा मिल सके।
इसे लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कुमार तिवारी ने आरटीआई के माध्यम कई अहम् जानकारियां उपलब्ध कराने की मांग की है।
तकनीशियन एवं कर्मचारियों की बहाली के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। बहाली होते ही आईसीयू शुरू कर दिया जाएगा।- डॉ. शिवेंद्र कुमार सिन्हा, सिविल सर्जन, भोजपुर  |
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