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क्‍या केंद्रीय बजट से पूरी होंगी बिहार की अपेक्षाएं? 2 लाख करोड़ से भी अधिक की उम्‍मीद लेकर जा रहे व‍ित्‍त मंत्री

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केंद्रीय बजट से ब‍िहार की बड़ी अपेक्षाएं।  



राज्य ब्यूरो, पटना। Union Budget 2026: बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव शनिवार को प्रस्तावित बजट पूर्व चर्चा में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बिहार की अपेक्षाओं से अवगत कराएंगे।

ये अपेक्षाएं दो लाख करोड़ से भी अधिक की हैं और इनमें उन परियोजनाओं व कार्यक्रमों पर विशेषकर फोकस है, जिनसे अधिकाधिक रोजगार सृजन के साथ राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का चेहरा विकसित राज्यों के समतुल्य दिखे।

इसके लिए प्रति व्यक्ति आय में आशातीत वृद्धि करनी होगी। इन अपेक्षाओं के हवाले में यादव बिहार में राजकोषीय अनुशासन और विकास की तेज गति का हवाला देंगे।  

वित्तीय वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट एक फरवरी को प्रस्तुत होगा, जिसे अंतिम रूप देने के लिए राज्यों से विचार-विमर्श होना है।
विशेष पैकेज, अधिकाधिक आवंटन, बड़ी परियोजनाओं के साथ प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने पर होगा जोर

बिहार सरकार केंद्र से विशेष पैकेज, अधिकाधिक धन के आवंटन और बड़ी परियोजनाओं के लिए दो लाख करोड़ रुपये या इससे अधिक की मांग करेगी।

यह मांग बिहार के विकास, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास के लिए होगी। पिछले वर्षों में भी (2024-25 और 2025-26) केंद्र ने बिहार के लिए विशेष प्रावधान किए थे।

पूर्वोदय योजना के अंतर्गत सड़क, हवाईअड्डा, जल संसाधन, मेडिकल कालेज और बिजली परियोजनाओं को स्वीकृति मिली थी।

2025 में वित्त विभाग का दायित्व संभाल रहे सम्राट चौधरी ने लगभग 1.50 लाख करोड़ की योजनाओं की अपेक्षा जताई थी।

चुनावी वर्ष होने के बावजूद बिहार के लिए केंद्रीय बजट में 58.9 हजार करोड़ की योजनाओं की घोषणा हुई। बिहार इस बार उससे भी अधिक चाह रहा, क्योंकि एनडीए की बड़ी जीत से जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने की चुनौती भी तगड़ी है।  
58.9 हजार करोड़ की योजनाएं आई थीं पिछली बार बिहार के हिस्से में

पिछले वर्षाें में बिहार ने तेज गति से विकास की है, लेकिन असमानता के बड़े-बड़े ढूह गांव-गली से लेकर शहर-बाजार तक हैं। इसका प्रमाण प्रति व्यक्ति आय है, जो राष्ट्रीय औसत के आधे के बराबर है।

वर्तमान मूल्य पर वित्तीय वर्ष 2024-25 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में वार्षिक वृद्धि दर 13.09 प्रतिशत रही। इसी अवधि में इसी पैमाने पर प्रति व्यक्ति जीएसडीपी 76490 रुपये रहा।

विकसित राज्यों से तुलना करने पर बिहार में प्रति व्यक्ति आय वहां के लगभग दो-ढाई दशक पीछे के जीवन-स्तर से अधिक की नहीं।

बिहार के विकास की यह असली चुनौती है और इससे पार पाने के लिए यहां अधिकाधिक निवेश की आवश्यकता है। बिजेंद्र यादव स्वयं दावा कर चुके हैं कि तकनीकी और संचार के क्षेत्र में बिहार पांच वर्षों में विकास की नई तस्वीर प्रस्तुत करेगा।

स्पष्ट है कि इन क्षेत्रों के लिए वे केंद्र से उदार हृदय होने की अपेक्षा करेंगे। ये उस आधारभूत संरचना के अंश हैं, जिनके बूते बिहार की विकास दर दोहरे अंक में बनी हुई है।

इसके साथ ही बंद चीनी मिलों के पुनर्जीवन और नए चीनी मिलों की स्थापना के साथ खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में निवेश की अपेक्षा होगी।
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