दुर्गापुर में आइएसएफ ने दिखाई ताकत, जेमुआ में निकाली विशाल जुलूस
जागरण संवाददाता, दुर्गापुर : विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही पश्चिम बंगाल के औद्योगिक शहर दुर्गापुर में सियासी पारा चढ़ने लगा है। दुर्गापुर-फरीदपुर ब्लाक के जेमुआ इलाके में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। वर्षों तक तृणमूल कांग्रेस का झंडा उठानेवाले अल्पसंख्यक समुदाय के कई कार्यकर्ता अब नौशाद सिद्दीकी की पार्टी आइएसएफ के साथ जुड़ रहे हैं। शुक्रवार को जेमुआ में आइएसएफ कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में पार्टी का झंडा और जुबान पर शिराय-शिराय रक़्तो, भाईजान एर भोक्तो के नारे लगाते हुए बड़ी संख्या में समर्थकों ने इलाके की जुलूस निकाली। प्रदर्शन में शामिल स्थानीय आइएसएफ नेता शेख जहीरुद्दीन ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि हमने सालों तक दीदी और पीसी का साथ दिया, यह सोचकर कि वे हमारे साथ खड़ी रहेंगी, लेकिन आज वक्फ बोर्ड और जमीन से जुड़े मुद्दों पर हमें डराया जा रहा है। सरकार सिर्फ आश्वासन देती हैं, काम नहीं करती। हमारी स्थिति ऐसी हो गई है कि अब आइएसएफ करना हमारी मजबूरी बन गई है। वहीं, एक अन्य आइएसएफ समर्थक ने विकास कार्यों को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि विगत 15 वर्षों में जो पुल और सड़कें बननी चाहिए थीं, वे नहीं बनीं। वाममोर्चा के समय स्वीकृत काम भी इस सरकार ने बंद कर दिए। आज युवाओं के पास नौकरी नहीं है, कल-कारखाने नहीं हैं। विकास के नाम पर सिर्फ मेला और खेला हो रहा है, जिसमें करोड़ों रुपये बर्बाद किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आइएसएफ सिर्फ मुसलमानों की पार्टी नहीं है, बल्कि इसमें हिंदू, आदिवासी, बाउरी और रविदास समाज के लोग भी जुड़ रहे हैं। आइएसएफ की इस सक्रियता पर भाजपा ने हमला बोला है। भाजपा के जिला प्रवक्ता सुमंत मंडल ने आइएसएफ के इस प्रदर्शन को वोट के समय आनेवाले पक्षी की तरह बताया। सुमंत मंडल ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में जिनका अब कोई वजूद नहीं बचा है, जिनका दाना-पानी वहां बंद हो चुका है, वहीं लोग अब आइएसएफ का झंडा लेकर घूम रहे हैं। ये वोट पक्षी हैं, जो चुनाव के समय आते हैं और फिर उड़ जाते हैं। इनका इस इलाके में कोई प्रभाव पड़नेवाला नहीं है। |