मोबाइल को ही सुरक्षाकर्मियों ने हथियार बनाया और गिरफ्तारी में सफलता मिल गई।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। तोता तस्कर जाहिद को बीते मंगलवार को पकड़ने के बाद आरपीएफ व जीआरपी के लोग जितने खुश थे, उससे ज्यादा यह जानकार प्रसन्न हैं कि बरामद 354 तोतों में कई की पश्चिम बंगाल पहुंचकर बलि चढ़ जाती। गिरफ्तार पश्चिम बंगाल के तोता तस्कर ने रेल सुरक्षा जवानों की पूछताछ में ऐसी ही जानकारी दी। जाहिद सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने में माहिर है, लिहाजा अबकी इसके मोबाइल को ही सुरक्षाकर्मियों ने हथियार बनाया और गिरफ्तारी में सफलता मिल गई।
इस तरह मोबाइल की घंटी बजी और जवानों ने घेर लिया
कैंट रेलवे स्टेशन पर तैनात आरपीएफ इंस्पेक्टर संदीप यादव ने बताया कि शातिर दिमाग जाहिद कुछ माह पूर्व भी अमेठी से तोता लेकर वर्धमान गया था। उस समय चकमा देने के लिए बनारस के बजाए मीरजापुर के रास्ते हाबड़ा निकल गया था। अबकी हमने उसका मोबाइल नंबर पता किया और ट्रेन के भदोही पहुंचने पर उसमें सिपाही को बैठा दिया।
भीड़ से भरे कोच में उसे पकड़ना मुश्किल था, ऐसे में ट्रेन को वाराणसी आने दिया गया। ट्रेन को कैंट स्टेशन पहुंची तो सादे वर्दी में फोर्स सीधा और उलटा दोनो साइट से दाखिल हुई। इसके बाद जाहिद के नंबर पर घंटी बजाई तो वह पकड़ गया। इसके बाद उसके साथ सख्ती की गई तो पांच झोले में भरे तोते बरामद हो गए।
भूखा रखे जाने से बोल नहीं पा रहे थे तोते
क्राइम इंटेलीजेंस ब्यूरो (सीआइबी) के इंस्पेक्टर निलेश सिंह ने बताया कि तोते प्यारे थे।वह बोल नहीं पा रहे थे, जब जाहिद से सख्ती की गई तो उसने बताया कि भूखे हैं। उन्हें कुछ खिलाइए तो बोल पड़ेंगे, ऐसा ही हुआ दाना, पानी दिए जाते ही ताेते ऐसे पंख फड़फड़ाए कि कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर वन विभाग को बुलाना पड़ा। पूछताछ में जाहिद ने बताया कि कुछ लोग तोतों की बलि भी चढ़ाने के लिए मोटे दाम पर खरीदते हैं।
डेढ़ सौ का तोता 1500 में बिकता है
जाहिद ने बताया कि वह अमेठी में औसत डेढ़ सौ में तोता खरीदकर पश्चिम बंगाल पहुंचाने के बाद 1500 रुपये मिलते हैं। बताया कि गले पर काला निशान मेल और निशान न होना फीमेल की पहचान है। अधिकांशत: लोग मेल-फीमेल तोता एक साथ खरीदते हैं। |
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