जांच टीम की रिपोर्ट में धोखाधड़ी की पुष्टि, 11 लोगों पर केस। सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। एक व्यक्ति को करीब 22 वर्ष पूर्व मृत दिखाकर उसके खेत पर कब्जा कर लिए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित को जब इसकी जानकारी हुई तो उसने पहले स्वयं के जीवित होने का प्रमाण दिया और फिर अपने साथ हुई कथित धोखाधड़ी के विरुद्ध न्याय की लड़ाई शुरू की।
करीब दो वर्षों तक विभिन्न अधिकारियों के समक्ष प्रकरण प्रस्तुत करने के बाद मामला जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन के संज्ञान में आया। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में धोखाधड़ी की पुष्टि की, जिसके आधार पर शोहरतगढ़ थाना पुलिस ने तीन महिलाओं सहित 11 आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
आरोपितों में चंदई गांव निवासी रामरती, रामप्रसाद, रामनिवास, बालकृष्ण, सुग्रीव, भागदेई, रामपाल, अर्जुन, सुलेखा, मोहन और रामानंद के नाम शामिल हैं। सभी पर कूटरचना कर भूमि अपने नाम कराने का आरोप है। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के चंदई गांव निवासी पीड़ित द्वारिका का कहना है कि वह वर्तमान में बलरामपुर जनपद के पचपेड़वा थाना क्षेत्र के मध्यनगर बसंतपुर में निवास कर रहा है।
पिता की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी के रूप में उसके नाम कृषि भूमि दर्ज थी। आरोप है कि 14 मार्च 1992 को उसके चचेरे भाइयों ने उसे मृत दिखाकर स्वयं को उत्तराधिकारी दर्शाते हुए खेत अपने नाम दर्ज करा लिया। पीड़ित के अनुसार जनवरी 2024 में पत्नी की तबीयत अचानक खराब होने पर पैसों की आवश्यकता पड़ी।
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खेत बेचने के उद्देश्य से जब उसने खतौनी निकलवाई तो इस कथित धोखाधड़ी की जानकारी हुई। इस बीच संबंधित चचेरे भाइयों की मृत्यु हो चुकी थी और भूमि उनकी पत्नियों व पुत्रों के नाम वसीयत के माध्यम से दर्ज हो चुकी थी।
इसके बाद पीड़ित ने जिलाधिकारी से शिकायत की, जिस पर जांच टीम गठित की गई। जांच टीम की रिपोर्ट में अभिलेखों में अनियमितता और कथित फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
वर्ष 1992 से जुड़े मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच टीम की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और प्रकरण की विवेचना की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। -
-नवीन कुमार सिंह, शोहरतगढ़ थानाध्यक्ष। |
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