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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भूमि अधिकार बिल पर सत्ताधारी दलों के बीच मतभेद, आगामी बजट सत्र में हंगामे की संभावना

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भाजपा इसे “लैंड जिहाद“ बताकर विरोध कर रही है।



राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर प्रदेश विधानसभा के आगामी बजट सत्र में एक बार फिर भूमि अधिकार बिल के मुद्दे पर सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस, पीडीपी और पीपुल्स कान्र्फेंस के हंगामे के आसार हैं।

पीडीपी चाहती है कि प्रदेश सरकार 20 साल से ज़्यादा समय से सरकारी, चराई (कहचराई), आम (शमिलात) ज़मीन पर रह रहे जम्मू-कश्मीर के निवासियों को मालिकाना हक दे। उसने इसके लिए पिछले सत्र में एक प्रस्ताव लाया था जिसे सदन ने खारिज कर दिया था।

सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने भी लैंड ग्रांट रूल्स, 2022 को रद करने और वर्ष 1960 के भूमि अनुदान नियम को लागू करने का निजि विधेयक आगामी सत्र में आ सकता है और इसी के सहारे सत्ताधारी दल अपने विरोधियों को विगत तीन माह से चुप करा रहा है।

नेशनल कान्फ्रेंस, पीडीपी, पीपुल्स कान्फ्रेंस, अवामी इत्तिहाद पार्टी और माकपा चाहे हैं कि जम्मू कश्मीर में सरकारी जमीनों पर लंबे समय से रहने वाले स्थानीय नागरिकों, पुराने लीजहोल्डरों को उक्त जमीन का अधिकार मिले। नेशनल कान्फ्रंस, पीडीपी, पीपुल्स कान्फ्रेंसनीत अन्य राज्यों के नागरिकों को प्रदेश में भूमि हस्तांतरित किए जाने के खिलाफ हैं और यह दल चाहते हैं कि इस पर पूरी तरह रोक हो।
उमर अब्दुल्ला ने भी मकान गिराए जाने की आलोचना की

सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण हटाने के लिए होने वाली कार्रवाई का यह दल कई बार विरोध कर चुके हैं और इसे मुस्लिम उत्पीड़न का भी नाम दे चुके हैं। जम्मू में गत दिनों एक यू टयूबर जोकि मुस्लिम है, के पिता के कथित अवैध मकान को गिराए जाने पर भी भूमि अधिकार का मुद्दा खूब उछला था।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी मकान गिराए जाने की आलोचना की थी, भाजपा नेता भी सांत्वना जताने गए थे। पीडीपी ने कहा था कि अगर हमारा बिल मंजूर किया गया होता तो ऐसा न होता। हमारे बिल को मुख्यमंत्री ने भू माफिया की मदद करने वाला बताया था।

पीडीपी के विधायक वहीद उर रहमान परा के अनुसार, आगामी सत्र में बहुत से मुद्दे हैं,जिन पर इस सरकार को जवाब देना होगा। हम जम्मू कश्मीर के लोगों के हित के लिए, जम्मू कश्मीर के कमजोर और गरीब लोगों के लिए भूमि अधिकार का मुद्दा उठाएंगे और पूछेंगे कि आखिर एक ही वर्ग को क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
गरीब-बेसहारा लोगों को मिले भूमि अधिकार

पीपुल्स कान्फ्रेसं के महासचिव इमरान रजा अंसारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में जो गरीब और बेसहारा लोग हैं, जिनके पास अपनी कोई जमीन नहीं है और बरसों से किसी सरकारी जगह पर अगर रह रहे हैं तो उन्हें बेघर करना सही नहीं है। सरकार को चाहिए कि वह उन्हें बसाए, उजाड़े नहीं। ऐसे लोगों को जमीन का हक मिलना चाहिए।

नेशनल कान्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने कहा कि पीडीपी ने जो बिल लाया था,वह कुछ खास लोगों की मदद करता था,लेकिन हमने जो निजि बिल लाया था और जो अभी बरकरार है और उम्मीद है कि आगामी सत्र में उस पर चर्चा होगी, पूरी तरह से जम्मू कश्मीर के लोगों के हक मे है।

यह वर्ष 2022 के भूमि अनुदान नियम को रद्द करने और 1960 के भूमि नियमों की बहाली को सुनिश्चचित बनाता है। यह जम्मू कश्मीर की जमीनों पर स्थानीय लोगों के हक केा प्राथमिकता देता है। यह पूछे जाने पर क्या उनके बिल को सरकार सदन में मंजूर कराएगी तो उन्होंने कहा कि यह जनहित का मुद्दा है।
हम यहां किसी को लैंड जिहाद की इजाजत नहीं देंगे

भाजपा के प्रवक्ता हरि दत्त शिशु ने कहा कि हम जम्मू-कश्मीर में भूमि अधिकार का बिल जो पीडीपी ने लाया था और जो नेशनल कान्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने लाया है, के समर्थक नहीं हैं। हम यहां किसी को लैंड जिहाद की इजाजत नहीं देंगे। आप कैसे अतिक्रमणकारियों को किसी सरकारी,सामुदायिक या वनीय भूमि का मालिक बना सकते हैं। इससे तो अन्य लोग भी सरकाीर जमीनों पर कब्जा करने को प्रेरित होंगे।

यहां जम्मू के आस पास कई अवैध कालौनियां बसी हैं और उनमें कौन रह रहाहै, जम्मू के आस पास के वनीय इलाकों में किस प्रकार एक समुदाय विशेष की आबादी नजर आने लगी है। इसे रोकना है। विधानसभा में हमारे नेता सुनील शर्मा के नेतृत्व में हमारे सभी विधायक ऐसे किसी भी कुत्सित प्रयास का विरोध करेंगे।
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